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राहुल गांधी के बाद क्या सीएम अशोक गहलोत की भी बढ़ेंगी मुश्किलें? ‘हाई प्रोफ़ाइल’ मामले में आज है फैसले का दिन

- केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मानहानि प्रकरण, दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट आज सुनाएगी फैसला, दर्ज साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर आएगा फैसला, सीएम अशोक गहलोत के खिलाफ है चरित्र हनन का आरोप, संजीवनी क्रेडिट को-ओपरेटिव होता से जुड़ा है मामला

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Defamation Case against CM Ashok Gehlot by Gajendra Singh Shekhawat

जयपुर।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर 'मोदी सरनेम' के मानहानि प्रकरण में सूरत की सीजेएम कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए 2 साल कैद की सज़ा भी सुनाई और सज़ा को 30 दिन के लिए निलंबित भी किया। इसे लेकर गुरुवार को दिनभर सूरत से लेकर दिल्ली और फिर पूरे देशभर में हलचलें देखी गईं। अब ठीक एक दिन बाद ही राजस्थान के मुख्यमंत्री पर भी एक अन्य मामले में मानहानि केस पर फैसले का दिन आया है।

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री द्वारा राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ मानहानि प्रकरण को लेकर आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। दरअसल, नई दिल्ली स्थित राउज़ एवेन्यू कोर्ट आज इस 'हाई प्रोफ़ाइल' प्रकरण पर अपना फैसला सुनाएगी। सूत्रों के अनुसार आज दोपहर बाद तक इस प्रकरण पर कोई फैसला आ सकता है।

गौरतलब है कि प्रदेश के बहुचर्चित संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी के कथित घोटाला मामले से शुरू हुआ विवाद केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया था। इस बीच दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के खिलाफ जमकर बयानबाज़ी की थी। नौबत यहां तक पहुंच गई कि केंद्रीय मंत्री शेखावत ने सीएम गहलोत पर चरित्र हनन का आरोप लगाते हुए राउज़ एवेन्यू कोर्ट में मानहानि का मुकदमा ही दर्ज करवा दिया।

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समन के साथ किया जा सकता है तलब
जानकारी के अनुसार राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने तमाम साक्ष्यों और बयानों के आधार पर अपना फैसला सुरक्षित रखा हुआ है, जिसे आज दोपहर करीब 4 बजे सुनाया जाएगा। संभावित है कि अदालत सीएम गहलोत को अपना पक्ष रखने के लिए समन जारी कर कोर्ट में तलब कर सकता है। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट (एसीएमएम) हरप्रीत सिंह ने आदेश जारी करने के लिए मामले को सूचीबद्ध किया है।

चरित्र हनन का लगाया था आरोप
केन्द्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सीएम अशोक गहलोत के खिलाफ मानहानि का दावा पेश करते हुए चरित्र हनन का आरोप लगाया था। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा था कि मेरे चरित्र पर बेवजह कीचड़ उछाला जा रहा है। अब चरित्र हनन की पराकाष्ठा हो चुकी है। पिछले लगभग 3 साल से विधानसभा में, मीडिया को बाइट देते समय, सड़क पर चलते हुए, रैली में भाषण देते हुए मुख्यमंत्री मेरे खिलाफ बयान दिए जा रहे हैं।

शेखावत ने कहा था कि घोटाले में मेरे और मेरे परिवार में किसी का भी नाम शामिल नहीं है। जबकि हाल ही में जोधपुर दौरे के दौरान भी सीएम गहलोत ने मेरे और मेरे परिवार को लेकर बयान दिया। उन्होंने मेरी दिवंगत माता का नाम भी इससे जोड़ा। इस बात से मैं काफी व्यथित हूं। वे सिर्फ राजनीतिक लाभ लेने के लिए मेरे ऊपर कीचड़ उछाल रहे हैं।

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... इधर आरोपों पर कायम रहे मुख्यमंत्री
सीएम अशोक गहलोत केंद्रीय मंत्री पर लगाए गए आरोपों पर अब भी कायम हैं। मीडिया को पिछले दिनों दी प्रतिक्रिया में उन्होंने मानहानि केस का स्वागत किया था। उन्होंने कहा कि कम से कम इस बहाने की ये केस आगे तो बढ़ेगा। जो गरीब चर्चा में नहीं थे उनका भला होगा। अब कम से कम डेढ़ दो लाख जिन लोग का पैसा डूब चुका है। किसी का एक करोड़, किसी का 50 लाख, 25 लाख वो पैसा कहां गया है? इथोपिया में गया है, यहां पर गबन हुआ है? कई लोग जेल में बैठे हुए हैं।

सीएम गहलोत ने फिर दोहराते हुए कहा कि गजेंद्र सिंह खुद मुल्जिम हैं। इसमें उनकी पत्नी, उनका साला, उनके पिताजी का नाम है, उनकी माता जी, जिनका देहांत हो गया है। ये हकीकत है, लेकिन इस प्रकरण में उन्होंने आज तक जुबान नहीं खोली।

सीएम गहलोत के इस बयान से गर्माया मामला
मुख्यमंत्री गहलोत ने केंद्रीय मंत्री शेखावत को संजीवनी घोटाले का जिम्मेदार ठहराया था और भूमिका अभियुक्त के सामान होने की बात कही थी। वहीं शेखावत को मिली ज़ेड प्लस सिक्युरिटी पर भी कई सवाल उठाये थे। मुख्यमंत्री ने जोधपुर प्रवास के दौरान संजीवनी क्रेडिट सोसाइटी पीड़ितों से मुलाक़ात करने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा था कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत इस मामले में अभियुक्त है उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जिनके पास कोऑपरेटिव विभाग भी है उनसे बात करके इस मसले को हल करना चाहिए। पीड़ितों को ब्याज न सही मूल रकम तो लौटा देनी चाहिए।

गहलोत ने यह भी कहा था कि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत इस मामले में अभियुक्त हैं, ऐसे में उन्होंने एसओजी से बचने के लिए जेड प्लस सुरक्षा ली है। मंत्री को यदि कोई खतरा था तो वह हमें बताते हम उन्हें राज्य में दूसरे बीजेपी नेताओं की तरह सुरक्षा उपलब्ध करवाते। केंद्र सरकार से जेड प्लस सुरक्षा लेने का मतलब एसओजी से बचना प्रतीत हो रहा है।