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जाने ऐसा क्या हुआ कि बोतल—लोटा लेकर निगम मुख्यालय के बाहर ही बैठ गए लोग

सांगानेर के दादाबाड़ी कच्ची बस्ती का मामला। लोगों को शौचालय निर्माण के लिए पहली किश्त मिली, बाद में रोकी।

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jaipur

जयपुर।जयपुर शहर को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) करने का दावा दिखावटी साबित हो रहा है। शहर में ऐसे कई इलाके हैं जहां अभी तक शौचालय नहीं है और लोग खुले में शौच कर रहे हैं। सांगानेर में दादाबाड़ी क्च्ची बस्ती के लोग हाथ में बोतल और लोटा लेकर मंगलवार को नगर निगम मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने निगम अफसरों पर अरोप लगाया कि शौचालय बनाने के लिए उन्हें एक किश्त तो दे दी लेकिन बाकी राशि रोक दी गई। कई महीने निकलने के बाद भी बकाया किश्त नहीं दी जा रही, जिससे शौचालय का निर्माण नहीं किया जा सका है। इससे मजबूरन लोगों को शौच के लिए बाहर जाना पड़ रहा है। इस दौरान कांग्रेस पार्षद भी राजनीति करने से नहीं चूके। वे खुद हाथ में बोतल लेकर मुख्यालय परिसर में ही बैठ गए। उन्होंने समस्या का समाधान निकवाने के लिए अधिकारियों से मिलने के बजाय लोगों को इस तरह से विरोध करने के लिए कहा। इस दौरान पार्षद धर्मसिंह सिंघानिया, मोहन मीणा के साथ अन्य पार्षदों ने प्रदर्शन भी किया।

बदनामी नहीं, समाधान जरूरी
उपमहापौर मनोज भारद्वाज, पार्षद अशोक गर्ग ने ऐसे मामले सार्वजनिक तौर पर उछालने की बजाय समाधान निकालने की जरूरत जताई। उनका कहना है कि इस तरह से जयपुर की बदनामी होती है, जो ठीक नहीं है। यदि कहीं परेशानी है तो उसका समाधान निकालने पर ध्यान देना होगा। इसमें विपक्ष की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी की शहरी सरकार की।

उठा ले गए अस्थाई शौचालय, बाहर पुलिस का पहरा
निगम ने भले ही शहर को ओडीएफ घोषित कर दिया है, लेकिन हकीकत यह है अब भी कई इलाकों में अपेक्षाकृत शौचालय है ही नहीं। इसमें 80 हजार से ज्यादा आबादी की जवाहर नगर कच्ची बस्ती भी शामिल है। यहां वन विभाग की आपत्ति के कारण शौचालय बनाए नहीं जा सके। अब यहां लगाए जा रहे अस्थाई शौचालय के केबिन भी उठा ले गए। टीला नं 1 के पास रखे ऐसे कई केबिन गायब मिले। इस बीच लोग खुले में शौच करने गए तो सुबह निगमकर्मियों ने पुलिस के साथ उन्हें रोक दिया। कईयों का चालान भी किया गया।

इससे गुस्साए लोगों मंगलवार को पार्षद संतरा वर्मा के कार्यालय पहुंचे। इस बीच मामला इतना बढ़ गया कि लोगों ने पार्षद को घेर तत्काल समाधान करने की जरूरत जताई। पार्षद ने भी माना कि शौचालय की पुख्ता व्यवस्था किए बिना ही चालान करने और निगमकर्मियों द्वारा निगरानी रखना सही परिपाटी नहीं है। इसके लिए महापौर से बात की जाएगी। हालांकि,महिलाओं ने विधायक अशोक परनामी पर आरोप लगाया कि समस्या सुलझाने का दावा करके ठग लिया गया।