राजस्थान में बड़ी संख्या में बच्चों को भी डेंगू मच्छर ने बनाया अपना शिकार,अब गांवों की ओर पसार रहा पैर
राजस्थान में स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के दावों की पोल डेंगू की बीमारी ने खोल कर रख दी हैं। घर घर सर्वे कर मच्छर मारने की दवा डाल आमजन को डेंगू के मच्छर से बचाने का दावा करने वाले स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल मरीजों के आंकड़ों ने खोल कर रख दी हैं।
वहीं नगर निगम के फोगिंग कर बारिश के बाद मच्छर भगाने के दावे भी डेंगू के आंकड़ों के आगे फेल हो गए।अक्टूबर माह में चिकनगुनिया, वायरल फीवर और डेंगू ने राजस्थान के लोगों की कमर तोड़ दी हैं। अक्टूबर माह में करीब 1300 डेंगू के मरीज प्लेटरेट्स की संख्या गिरने से अस्पतालों में जाकर भर्ती हुए।
इसमें बड़ी संख्या में बच्चे भी जाकर अस्पताल में भर्ती हुए।
जेके लोन अस्पताल जयपुर के डॉ.धनराज बागड़ी -ने बताया कि अक्टूबर माह में बड़ी संख्या में बच्चे डेंगू से बीमारी से पीड़ित होकर अस्पताल में पहुंचे। अभी भी जेके लोन की ओपीडी में वायरल और डेंगू से पीड़ित होकर मरीज अस्पताल में पहुंच रहे हैं। शहर के बाद अब ग्रामीण इलाकों में डेंगू के केस बढ़ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों की माने तो 11 अक्टूबर से 3 नवम्बर तक 1259 लोग डेंगू से पीड़ित हुए हैं। यह आंकड़ा राजस्थान प्रदेश में मिले अन्य बीमारियों के मरीजों के मुकाबले काफी बड़ा हैं। इसमें करीब 30 प्रतिशत संख्या बच्चों की संख्या हैं।
स्वास्थ्य विभाग और निगम की टीम सिर्फ आंकड़ों और कागजों में अपना काम रही हैं। वहीं आमजन की लापरवाही परेशानियां बढ़ा रही है। डेंगू और चिकनगुनिया दोनों ही मच्छरों के काटने से फैलता है।
दोनों में अचानक तेज बुखार आकर,उल्टी,चक्कर आना और शरीर में कमजोरी आना प्रमुख लक्ष्ण हैं। लेकिन डेंगू में प्लेटरेट तेजी से गिरती है। एक स्वस्थ व्यक्ति में सामान्य प्लेटलेट काउंट 150 हजार से 450 हजार प्रति माइक्रोलीटर होता है।
जब यह काउंट 150 हजार प्रति माइक्रोलीटर से नीचे चला जाता है तो इसे लो प्लेटलेट माना जाता है।प्लेटरेट गिरने से व्यक्ति की मौत तक हो जाती हैं।
भरें। खाली व टूटे-फूटे टायरों, डिब्बों तथा बोतलों को फेंक दे। घर के आस-पास सफाई रखें।कहीं भी पानी नहीं भरना चाहिए।
पानी की टंकियां तथा बर्तन को सही तरीके से ढक कर रखें ताकि मच्छर उसमें प्रवेश ना कर सके और प्रजनन न कर पाए। मच्छरों को भगाने व मारने के लिए मच्छर नाशक क्रीम, स्प्रे, मैट्स, कॅाइल्स आदि प्रयोग करें।
मेंनिक्कर व टीशर्ट ना ही पहनाए तो अच्छा है।