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विपरीत मौसम के बावजूद मिली बेहतर पैदावार

सरसों अनुसंधान निदेशालय के वैज्ञानिकों ने पिछले वर्षों में विकसित दो किस्मों आरएच 749 एवं गिरिराज के 100 प्रथम पंक्ति प्रदर्शन जिले में इस वर्ष लगाए गए थे। 

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Moti ram

May 11, 2015

सरसों अनुसंधान निदेशालय के वैज्ञानिकों ने पिछले वर्षों में विकसित दो किस्मों आरएच 749 एवं गिरिराज के 100 प्रथम पंक्ति प्रदर्शन जिले में इस वर्ष लगाए गए थे।

अधिकांश किसानों एवं गांवों में इन किस्मों की अधिक उपज क्षमता, विपरीत मौसम को सहन करने, तना गलन बीमारी का कम प्रकोप आदि गुणों को देखकर किसानों में नई उम्मीद की किरण जागी है।

निदेशालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि किसी भी फसल से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए उन्नत किस्म का बीज प्रयोग करना सबसे महत्वपूर्ण है। यदि किस्म अच्छी नहीं है तो किसान कितनी भी मेहनत कर ले, कितनी ही खाद, उर्वरक एवं अन्य आदानों का प्रयोग करे, इससे अच्छा उत्पादन प्राप्त नहीं हो सकता।

उन्नत किस्म एवं गुणवत्ता वाले बीज के महत्व को देखते हुए ही सरसों अनुसंधान निदेशालय ने अपनी अखिल भारतीय राई-सरसों समन्वित परियोजना के अन्तर्गत सरसों की उन्नत किस्मों के विकास के लिए निरन्तर अनुसंधान किया जा रहा है। विकसित उन्नत किस्मों के प्रयोग से विगत वर्षों में सरसों का उत्पादन बढ़ा है।

तेल की मात्रा ज्यादा
ततामड़ के श्याम संस्था के अध्यक्ष कुंवर सिंह ने बताया कि निदेशालय के साथ गांव सिनपिनी में करीब 20 प्रदर्शन लगाए गए थे जहां इन किस्मों को किसानों ने काफी पसंद किया। इन किस्मों में अधिक शाखा में निकली फली की लम्बाई अधिक थी। दाने में चमक थी और उपज 15-17 क्विंटल प्रति हैक्टेयर प्राप्त हुई जो कि हमारी किस्मों से अधिक थी।

इन किस्मों के बीज में तेल की मात्रा भी अधिक निकल रही है। ऊंचा गांव के रूपकिशोर ने बताया कि उन्होंने आरएच 749 किस्म बोई थी, जिसका उत्पादन 15 क्विंटल प्रति हैक्टेयर रहा, जबकि गांव में दूसरी किस्मों की औसत उपज 10-12 क्विंटल प्रति हैक्टेयर ही रहा। ग्राम धौर के अमरचन्द ने बताया कि उनके गांव में 13-15 क्विंटल प्रति हैक्टेयर उपज इन किस्मों से प्राप्त हुई।

मुरवारा के बसन्ताराम ने बताया कि निदेशालय की ओर से विकसित किस्मों की अधिक उपज क्षमता को देखते हुए किसान इन किस्मों को पसंद कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि इस वर्ष फसल पकाव के समय मौसम खराब होने से फसल को नुकसान हुआ है। अन्यथा इस वर्ष इन किस्मों की बढ़वार इतनी अच्छी थी कि 20-25 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक उपज प्राप्त होने की संभावना थी।

बीमारी से भी बचे
नदबई जिले के न्यौठा गांव के किसान रामभरोसी ने बताया कि उनकेे गांव में करीब 15 किसानों के यहां इन किस्मों का प्रदर्शन लगाया गया था। इनमें से अन्य किस्मों के मुकाबले आरएच 749 सर्वश्रेष्ठ किस्म रही, जिसकी औसत उपज 17-18 क्विंटल प्रति हैक्टेयर रही। इस किस्म में तना गलन की बीमारी नहीं के बराबर थी, जबकि अन्य किस्मों में यह बीमारी बहुतायत में पाई गई।

इसका तना बहुत मजबूत था, जिसके कारण यह फरवरी में हुई वर्षा एवं अंधड़ में भी गिरी नहीं, जबकि और फसलें गिर गईं। प्रति पौधा इसमें 60-80 फलियां थी जबकि और किस्म में 40-50 फलियां ही पाई गई थी। इन किस्मों की उपज क्षमता एवं गुणों को देखकर गांव में ही और आसपास के अन्य किसानों ने अगले वर्ष के लिए इसके बीज की मांग कर रखी है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
निदेशालय की किस्मों की अधिक उपज क्षमता एवं किसानों की पसंद को देखते हुए निदेशालय द्वारा इन किस्मों के बीज उत्पादन कार्य को देखते हुए निदेशालय द्वारा इन किस्मों के बीज उत्पादन कार्य को बढ़ाया गया है। किसानों को सितम्बर माह में इनका बीज उपलब्ध करवाया जाएगा।
डॉ. धीरज सिंह, निदेशक, सरसों अनुसंधान निदेशालय