
जयपुर। राज्य के सरकारी स्कूलों में लिए जा रहे मनमाने विकास शुल्क से अब विद्यार्थियों को राहत देने की कवायद की जा रही है। विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति की ओर से निर्धारित विकास शुल्क प्रदेश के स्कूलों में समान होगा। विभाग की ओर से न्यूनतम और अधिकतम शुल्क तय किया जाएगा। इसके लिए शिक्षा विभाग ने एक प्रस्ताव सरकार को भेजा है। सरकार की हरी झंड़ी के बाद इसे लागू किया जाएगा। गौरतलब है कि राज्य के सरकारी स्कूलों में विकास शुल्क निर्धारित नहीं है। विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति अपने स्तर पर ही शुल्क तय कर लेती है। ऐसे में शुल्क को लेकर असमानता देखने को मिल रही है। किसी स्कूल में न्यूनतम 200 रुपए तो किसी स्कूल में अधिकतम 2100 रुपए तक विकास शुल्क वसूला जा रहा है। इससे विद्यार्थियों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
पत्रिका ने उठाया मुद्दा, सरकार ने मांगी रिपोर्ट
राजस्थान पत्रिका में पिछले दिनों राज्य के स्कूलों में लिए जाने वाले विकास शुल्क का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इसमें बताया गया था कि स्कूलों में विकास शुल्क के नाम पर छात्रों से मनमानी वसूली की जा रही है। इस पर अभिभावक भी आपत्ति जता रहे हैं। इसके बाद सरकार ने शिक्षा विभाग से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी। सरकार के निर्देश पर विभाग ने स्कूल प्रिंसिपल को तलब कर रिपोर्ट मांगी थी।
स्कूलों में विद्यार्थियों से अधिक विकास शुल्क लेने के मामले सामने आए हैं। सरकार ने रिपोर्ट मांगी है। सरकार को वास्तुस्थिति से अवगत कराया गया हैं। समान विकास शुल्क का प्रस्ताव भेजा हैं।
कानाराम, निदेशक माध्यमिक शिक्षा
Published on:
26 Dec 2021 04:59 pm
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