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सबसे बड़ी हीरे की खान के रहस्य जानकर रह जाएंगे दंग

-मीर खान, जिसने सोवियत संघ को महाशक्ति बनाया

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-मीर खान, जिसने सोवियत संघ को महाशक्ति बनाया

सबसे बड़ी हीरे की खान के रहस्य जानकर रह जाएंगे दंग

जयपुर.

पूर्वी साइबेरिया में 1722 फुट गहरी और 1.25 किलोमीटर व्यास की ये है मीर खदान। आज इसकी वैल्यू 13 बिलियन पाउंड (करीब एक लाख 18 हजार करोड़ रुपए) है। मीर खदान का गड्ढा देखकर लगता है जैसे यह किसी उल्कापात से बना होगा। हालांकि 2004 में खुली खदान का संचालन बंद हो गया था, लेकिन इसे भूमिगत सुरंगों की एक शृंखला में बदल दिया गया। 2014 में इसमें 60 लाख हीरे (तराशने के बाद) निकाले गए थे। मास्को के पूर्व में 5 हजार मील की दूरी पर स्थित इस गड्ढे को उस वक्त बंद कर दिया गया, जब कथित रूप से इसके ऊपर हेलिकॉप्टर को खींचे जाने की बात सामने आई। इस खान का स्वामित्व रूसी कंपनी अलसोरा के पास है, जो दुनिया के कुल हीरा उत्पादन का एक चौथाई पैदा करती है। मीर खदान में एक बार बीस लाख कैरेट के हीरे का उत्पादन भी किया जा चुका है, जिसकी कीमत 20 अरब पाउंड थी। इसके पास की खदानों ने भी दुनिया के 13 फीसदी हीरे निकाले थे। यहीं से निकला ओलोंकहो हीरा सबसे बड़ा था। 130.85 कैरेट के इस हीरे की कीमत दो करोड़ 26 लाख रुपए थी। द्वितीय विश्व युद्ध से तबाह होने के बाद सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन ने मीर खान से प्राप्त धन से देश के पुनर्निर्माण का कार्य शुरू किया और सोवियत संघ महाशक्ति बनकर उभरा।
ऐसी है हीरे की मीर खान
1722 फुट गहरी है हीरे की खान
1.25 किलोमीटर व्यास
02 करोड़ 26 लाख का सबसे कीमती हीरा था ओलोंकहो
60 लाख हीरे तराशे गए थे 2014 में
2014 में खुली खान का संचालन बंद हो गया था
20 लाख कैरेट के हीरे निकाले गए थे एक बार