
जयपुर। मूल्य आधारित और जिम्मेदार पत्रकारिता क्या होती है, यह बात गुलाब कोठारी के प्रथम पृष्ठ पर प्रकाशित आलेखों के संग्रह को पढ़कर समझ में आती है। इसलिए पत्रकारिता में आने वाले हर छात्र को ये पुस्तक पढ़नी चाहिए। यह बात हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुधि राजीव ने कही।
वे रविवार को जवाहर कला केंद्र में आयोजित पत्रिका बुक फेयर में राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की पुस्तक ‘संप्रेषण की समग्रता’ पर चर्चा कर रही थीं। उन्होंने कहा, इनमें ऐसे संदेश हैं, जो समाज की हर चीज और हर क्षेत्र को छूते हैं। इन्हें पढ़कर आत्म संतोष की अनुभूति होती है।
समाचार पत्रों के संपादकीय आलेख अधिकतर समकालीन घटना विशेष पर प्रतिक्रिया होते हैं। ये आलेख भुला दिए जाने वाले भी होते हैं, लेकिन कोठारी के आलेखों की एक अलग पहचान है। ये आलेख दलगत भावना से हटकर, बिना पक्षपात के समस्याओं का गैर राजनीतिक समाधान प्रस्तुत करते हैं।
उन्होंने कहा, इनको पढ़कर ऐसा लगा जब कोठारी समकालीन मुद्दों पर लिखते हैं तो वे उनके हिस्सेदार होते हैं। उनके लिखे को पढ़ने से प्रेरणा मिलती है। पत्रकारिता तलवार की धार पर चलने जैसा है। सच की राह पर चलेंगे तो चुनौतियों से भी सामना होगा।
वरिष्ठ पत्रकार गोविंद चतुर्वेदी ने पुस्तक में प्रकाशित आलेखों पर चर्चा करते हुए कहा, कोई बात कहने की सफलता तभी है जब कही गई बात दिल में उतर जाए और लोग उसका अनुसरण करें। ऐसे ही आलेखों का संग्रह इस पुस्तक में है। इनमें विराट संपादकीय स्वरूप नजर आता है।
जीवन के हर क्षेत्र पर लिखा गया है। उन्होंने एक संपादकीय का उदाहरण देते हुए कहा, राजस्थान सरकार ने एक ऐसा कानून बनाया जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला तो था ही, भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षित करने का कुत्सित प्रयास भी था। पत्रिका ने इसे काला कानून करार देते हुए जोरदार विरोध किया।
सरकारी मंशा पर सवाल उठाते हुए गुलाब कोठारी ने संपादकीय लिखा। संपादकीय छापने के साथ यह भी तय किया कि जब तक सरकार काला कानून वापस नहीं लेगी तब तक सरकार और मुयमंत्री की खबरें नहीं छपेगी। असर यह हुआ कि सरकार को काला कानून वापस लेना पड़ा। परिचर्चा के दौरान एडवोकेट सोनाली खत्री ने पत्रकारिता के भविष्य के बारे में सवाल पूछा। इस पर चतुर्वेदी ने कहा, पत्रकारिता का भविष्य उज्ज्वल है।
यह पुस्तक दो भागों में प्रकाशित हुई है। इन आलेखों में कोठारी ने सामयिक विषयों-मुद्दों पर जो विचार व्यक्त किए हैं वह जनता के लिए मार्गदर्शक, सरकारों के लिए पथप्रदर्शक और जनता की प्रभावशाली आवाज बनकर जनमानस में अंकित हुए हैं। कोठारी ने अकाल, सूखा, पानी की कमी, चरागाहा, भूमि का रेगिस्तान में बदलना, राजनीति, शिक्षा, भ्रूण हत्या, सामाजिक सौहार्द स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा आदि ज्वलंत विषयों पर लेखन किया है।
वरिष्ठ पत्रकार आनंद जोशी ने कहा, इन आलेखों में यह झलकता है कि पाठकों को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि वह अपनी समस्या से अकेला लड़ रहा है। उसके साथ राजस्थान पत्रिका और संपादक हमेशा खड़े हैं। संपादकीय आलेखों की यह पुस्तक एक दस्तावेज है। इन लेखों का भारी असर रहा। संप्रेषण का मूल तत्व है कि एक-एक शब्द समझ में आना चाहिए, वरना संप्रेषण अधूरा है। गुलाब कोठारी मन के चितेरे हैं उन्हें मन को पढ़ना खूब आता है। मन से लिखा ही मन को छू सकता है। ये सभी संपादकीय मन को छूने वाले हैं।
जोशी ने दो संपादकीय आलेखों का उदाहरण देते हुए कहा, जब राजस्थान में पानी की कमी हुई तो उन्होंने संपादकीय लिखा ‘आओ पानी बचाएं’ इसके बाद लिखा ‘हर व्यक्ति भागीरथ’। इन आलेखों का व्यापक असर हुआ। कोठारी के आव्हान पर अमृतं जल अभियान पूरे राज्य में शुरू हुआ हुआ।
इसमें वे खुद आगे रहे और पूरे स्टाफ के साथ स्वयं श्रमदान करने तालकटोरा पहुंचे। आज तालकटोरा लबालब दिखता है। अभियान में जनभागीदारी से सैकड़ों जलस्रोतों का जीर्णोद्धार और सफाई हुई। उनमें जल का संग्रह होने लगा। लोग पानी बचाने के लिए जागरूक हुए। आलेखों के बारे में बताते हुए कार्यक्रम की मॉडरेटर श्वेता तिवारी ने कहा, इनमें भारतीय चिंतन भी झलकता है।
Published on:
24 Feb 2025 07:38 am
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