
क्या आप जानते हैं राजधानी के इस डॉल्स संसार के बारे में, पढें ये खबर
जयपुर. राजधानी का एकमात्र डॉल म्यूजियम पर्यटकों को तरस रहा है। जेएलएन मार्ग पर जेके लोन अस्पताल के पास मुख्य सड़क पर स्थित होने के बावजूद ये पर्यटकों को आकर्षित नहीं कर पा रहा है। पिछले साल इसका जीर्णोद्धार भी कराया गया, फिर भी गुमनामी में है। यहां दुनिया के विभिन्न देशों की 700 गुडिय़ाओं का संग्रह है, जिसमें भारतीय और विदेशी के लिए अलग-अलग विंग हैं। संग्रहालय स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन है। एेसे में पर्यटन के एतबार से इसका प्रचार-प्रसार नहीं हो पा रहा है। हाल यह है कि हर माहं दो से तीन विदेशी पर्यटक ही यहां आ पाते हैं। बाकि स्कूली छात्रों को ही यहां विजिट कराया जाता है।
ये हैं आकर्षण
डॉल म्यूजियम में कुछ खास तरह की डॉल्स को कई देशों की संस्कृति के साथ दिखाया गया है जो उन देशों की सभ्यता और संस्कृति के साथ ही वहां की परम्परागत रहन—सहन को भी दर्शाती है। इन्हें देखकर दर्शक कई बार आकर्षित होते हैं क्योंकि यहीं से उन्हें कई देशों की जानकारी उपलब्ध हो जाती है।
जापान की गुडि़या: जापानी हिना मास्तुराई डॉल्स और परम्परागत जापानी गुडिय़ाएं हैं। ये डॉल्स जापान की संस्कृति, रीति-रिवाज, युद्ध शैली, धार्मिक परम्पराएं और रहन-सहन को दर्शाती हैं।
अरबी गुडि़याएं: स्वीडन, स्विट्जरलैंड, अफगानिस्तान, ईरान और अरब देशों की डॉल्स भी यहां हैं।
भारतीय विंग: विभिन्न प्रांतों की संस्कृति को दर्शाने वाली डॉल्स को संग्रहित किया गया है।
वर्तमान टिकट दर
छात्र —05
भारतीय पर्यटक —10
विदेशी पर्यटक —15
5 लाख में निखारा था
पिछले साल ही पांच लाख की लागत से म्यूजियम का जीर्णोद्धार किया था। इसमें विभिन्न देशों की 400 नई डॉल्स को डिस्प्ले में शामिल किया गया था। पहले यहां 300 डॉल्स का ही संग्रह था।
पर्यटन विभाग भी इसमें रुचि दिखाए तो यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में इजाफा हो सकता है। संग्रहालय को प्रचार-प्रसार की जरूरत है। - एसएस भंडारी, मैनेजिंग ट्रस्टी, यशवंत कंवर एवं रणजीत सिंह भंडारी मैमोरियल फाउंडेशन
Published on:
01 Jul 2018 01:13 pm

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