
संभाग के सबसे बड़े महाराणा भूपाल चिकित्सालय में व्याप्त खामियों से मरीजों को होने वाली परेशानियों का एक और मामला मंगलवार को सामने आया। खुद चिकित्सालय के पास एम्बुलेंस होने के बावजूद यहां के मरीजों को सरकारी सुविधा नहीं मिल रही। प्रशासनिक ढिलाई एवं निजी एम्बुलेंस चालकों का डर, चिकित्सकों पर इस कदर भारी है कि स्वयं चिकित्सालय अधीक्षक के कार्य स्थल (ट्रोमा वार्ड) के बाहर पार्र्किंग में सरकारी एम्बुलेंस खड़ी करने की जगह नहीं मिलती। वार्ड के बाहर निजी एम्बुलेंस चालकों का 24 घंटे कब्जा रहता है। एेसे में कई बार चिकित्सकों को खुद के वाहन के लिए पार्र्किंग की जगह ढूंढऩी पड़ती है। चिकित्सालय के पास स्वयं की प्रोटक्शन फोर्स एवं पुलिस चौकी होने के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर कथित 'दादागिरीÓ करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई से बचता है। दूसरी ओर हकीकत यह है कि चिकित्सालय प्रशासन अब तक परिसर में खड़ी प्राइवेट एम्बुलेंसों की दरें तय नहीं कर पाया है। प्राइवेट एम्बुलेंस किराया बोर्ड लगाने में भी देरी हो रही है।
एम्बुलेंस पर डॉक्टर
आलम यह है कि नियमों को धता बताकर चिकित्सालय स्तर पर करीब एक साल पहले खरीदे गए एम्बुलेंस वाहन का उपयोग आपातकालीन सेवाओं में आने वाले चिकित्सकों को घर से लाने और छोडऩे में हो रहा है। जबकि, हकीकत यह है कि राजस्थान मेडिकल रिलीफ सोसाइटी के नियमों में चिकित्सकों की रात्रि सुविधा को लेकर निजी वाहन किराए पर लगाने का प्रावधान किया है।
हम खुद परेशान
ट्रोमा वार्ड के बाहर निजी एम्बुलेंस खड़ी रहती हैं। इसलिए हमें अपने वाहन दूसरी ओर खड़े करने पड़ते हैं। रोगी सुविधा के लिए एक और एम्बुलेंस लाने की प्रक्रिया चिकित्सालय की ओर से जारी है। इस मामले में अधीक्षक के साथ बैठक भी हो चुकी है।
डॉ. अनामेंद्र शर्मा, एम्बुलेंस एवं वाहन प्रभारी, एमबी चिकित्सालय
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