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फ्री में होगी AI से ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग, पहली बार अमरीका की तकनीक का राजस्थान में होगा प्रयोग

Doctors Of Rajasthan International : डोरी के फाउंडर प्रेजिडेंट डॉ. जयवीर सिंह राठौड़ (यूएसए) ने बताया कि अमरीका में विकसित यह तकनीक एक मोबाइल फोन के आकार का एआइ-सक्षम अल्ट्रासॉनिक उपकरण है जिसे किसी भी बैग या जेब में लेकर आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है।

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फोटो: पत्रिका

AI Breast Cancer Screening In Rajasthan: राजस्थान में ब्रेस्ट कैंसर से होने वाली मौतों को कम करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) से गांव-गांव स्क्रीनिंग की जाएगी। डॉक्टर्स ऑफ राजस्थान इंटरनेशनल (डोरी) की ओर से अक्टूबर से एआइ-संचालित अल्ट्रासाउंड तकनीक के जरिए नि:शुल्क ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग अभियान शुरू किया जाएगा। दावा है कि भारत में इस तकनीक का पहला प्रयोग होगा जो विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं के लिए एक नई उम्मीद बनेगा। इस अभियान के लिए राज्य सरकार से भी वार्ता की जा रही है।

राजस्थान में अभी तक ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग मुख्यतः सेल्फ एग्जामिनेशन या शहरी क्षेत्रों में सीमित मैमोग्राफी के जरिए ही होती रही है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (एनएफएचएस) के आंकड़ों के अनुसार 30-49 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में सिर्फ 1.7 प्रतिशत महिलाओं ने ही कभी ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग करवाई है जबकि राष्ट्रीय औसत 8.7 प्रतिशत है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो यह प्रतिशत और भी कम है जिससे देर से पता चलने पर जान का खतरा बढ़ जाता है। राजस्थान में महिलाओं में स्तन कैंसर से होने वाली सालाना अनुमानित मौतें 4 हजार से अधिक हैं, जबकि देश में यह करीब 2.16 लाख है।

चिंताजनक हालात

ग्लोबलकान-2020 के अनुसार, भारत में हर आठवीं महिला को जीवन में एक बार ब्रेस्ट कैंसर का खतरा होता है। ज्यादातर मरीजों में इस रोग का पता तब चलता है जब यह शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुका होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, यदि प्रारंभिक चरण में पता चल जाए, तो ब्रेस्ट कैंसर का रिकवरी रेट 90 प्रतिशत से अधिक हो सकता है।

कैसे काम करेगी नई तकनीक?

डोरी के फाउंडर प्रेजिडेंट डॉ. जयवीर सिंह राठौड़ (यूएसए) ने बताया कि अमरीका में विकसित यह तकनीक एक मोबाइल फोन के आकार का एआइ-सक्षम अल्ट्रासॉनिक उपकरण है जिसे किसी भी बैग या जेब में लेकर आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है। इसमें से कोई रेडिएशन भी नहीं निकलता। सिर्फ 5-7 मिनट में स्क्रीनिंग पूरी हो जाती है। अगर कोई आशंकित लक्षण दिखाई देने पर उसी महिला को मेमोग्राफी व बायोप्सी के लिए रेफर किया जाएगा।

इससे कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान संभव हो सकेगी जिससे इलाज के सफल होने की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी। अभियान में राजस्थान में 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को विशेष रूप से लक्षित किया जाएगा, क्योंकि यही आयु वर्ग ब्रेस्ट कैंसर के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील है। इसके लिए पैरामेडिकल स्टाफ को विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी और फिर वे ही गांव-गांव जाकर स्क्रीनिंग अभियान चलाएंगे।