
Rajasthan Teachers : शिक्षा मंत्री के सरकारी आवास पर पहुंचा दिव्यांग शिक्षक (फाइल)। फोटो पत्रिका
Rajasthan Teachers : एक तो कुदरत की मार, उस पर सिस्टम की संवेदनहीनता… सरकार ने नौकरी तो दी, लेकिन जीने का हक छीन लिया। आंखों को नम कर देने वाली यह पीड़ा राजस्थान के उन दिव्यांग शिक्षकों की है, जिनके लिए शिक्षक भर्ती-2022 में चयन होना किसी वरदान के बजाय एक बड़ी 'सजा' बन गया है। गंभीर शारीरिक चुनौतियों से जूझ रहे इन नवनियुक्त दिव्यांग शिक्षकों को गृह जिले के बजाय 500 से 700 किलोमीटर दूर सीमावर्ती जिला बाड़मेर में नियुक्त कर दिया गया है। 40 से लेकर 83 फीसदी तक की दिव्यांगता झेल रहे इन युवाओं के लिए इतनी लंबी दूरी तय कर नौकरी करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
ये शिक्षक पिछले कई दिनों से सचिवालय की सीढ़ियां चढ़ रहे हैं, शिक्षा निदेशालय के चक्कर काट रहे है और मंत्रियों के बंगलों के बाहर गुहार लगा रहे है। वैसाखियों और व्हीलचेयर के सहारे तेज धूप में अधिकारियों के चक्कर काटते इन युवाओं की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
जितेन्द्र शर्मा (नागौर) : 83 फीसदी दिव्यांगता से जूझ रहे जितेन्द्र को बाड़मेर में नियुक्ति दी गई है। इतनी गंभीर शारीरिक स्थिति में नियमित चिकित्सा सुविधाओं और पारिवारिक सहयोग के बिना एक नए और दूरदराज के जिले में अकेले रहना उनके स्वास्थ्य के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
धर्मवीर (श्रीगंगानगर) : 40 फीसदी दिव्यांग धर्मवीर को बाड़मेर भेज दिया गया है। श्रीगंगानगर से बाड़मेर की दूरी उनके हौसलों को तोड़ने के लिए काफी है। नियमित आवागमन, रहने की व्यवस्था उनके बजट और शरीर दोनों से बाहर हो रही है।
अनिल वुलानिया (झुंझुनूं) : 60 फीसदी दिव्यांगता के बावजूद अनिल को सैकड़ों किलोमीटर दूर भेज दिया गया। वे कहते हैं कि गृह जिले से दूर रहने पर उनके इलाज और देखरेख का पूरा ढांचा ही चरमरा गया है।
पीड़ित दिव्यांग अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान उनका डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन उनके गृह जिलों में ही कराया गया था। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि दिव्यांगता के नियमों के तहत काउंसलिंग के माध्यम से उन्हें घर के पास ही पोस्टिंग मिलेगी, लेकिन ऐन वक्त पर काउंसलिंग प्रक्रिया को रोक दिया व अचानक बाड़मेर से आदेश जारी कर इन्हें दूर बुला लिया। नियमों को ताक पर रखकर जारी किए आदेश ने शिक्षकों को मानसिक रूप से तोड़ दिया है।
जो 100 फीसदी दिव्यांग हैं, ऐसे हर शिक्षक और कर्मचारी को हम गृह जिले में ही पदस्थापन कर रहे हैं। दिव्यांग शिक्षक आए थे, उनकी पीड़ा सुनी है। अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। नियमानुसार समाधान करेंगे।
मदन दिलावर, शिक्षा मंत्री
Updated on:
25 Jun 2026, 8:16 AM IST
Published on:
25 Jun 2026, 8:16 AM IST
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