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जयपुर

कुत्तों को खाना नहीं मिला तो मृत श्वान को आधा खा गए

  -अंदर की बात बाहर न आए, इसके लिए प्रवेश निषेध रहता -सिर्फ पैसे कमाने में जुटा एनजीओ, निगम के चिकित्सक निगरानी करने भी नहीं जाते

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जयपुर। जयसिंहपुरा खोर में बने श्वान घर में कु त्तों की बेकद्री हो रही है। अंदर की अव्यवस्थाएं बाहर न आएं, इसके लिए सामान्य व्यक्ति के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है। इतना ही नहीं, यहां बने बाड़ों में श्वानों को ठूंस ठूंसकर रखा जा रहा है। आए दिन श्वान आपस में लड़ते रहते हैं। बीते दिनों तो लड़ाई में एक श्वान मर गया। भूख की वजह से बाड़े में बंद श्वानों ने मृत कुत्ते को ही खा लिया। हद तो तब हो गई, जब यहां तैनात कर्मचारियों ने मृत श्वान को बाहर तक नहीं निकला। इतना सब कुछ होने के बाद भी हैरिटेज नगर निगम की पशु प्रबंधन शाखा के चिकित्सक मौके पर नहीं पहुंचे और न ही श्वान के मरने की वजह जानी।
दरअसल, एंटी बर्थ कंट्रोल (एबीसी) प्रोग्राम के तहत हैरिटेज निगम सीमा से श्वानों को पकडकऱ श्वान घर लाया जाता है और यहां बधियाकरण किया जाता है। श्वान को पकडऩे से वापस छोडऩे तक सामान्य तौर पर श्वान घर में चार दिन तक रोका जाता है।

दो घंटे तक किया इंताजर, नहीं मिले आयुक्त
पॉज संस्था के प्रतिनिधि सोमवार को हैरिटेज नगर निगम पहुंचे। दो घंटे इंतजार के बाद आयुक्त विश्राम मीणा नहीं मिले। इन लोगों का कहना था कि अव्यवस्थाओं की शिकायत लेकर आए थे, लेकिन उन्होंने व्यस्त होने का हवाला देकर मिलने से मना कर दिया।

सर्वाधिक भुगतान हो रहा इस बार
श्वानों के बधियाकरण का काम हृयूमन वेलफेयर सोसाइटी के पास है। निगम प्रति श्वान सोसइटी को 1512 रुपए का भुगतान कर रहा है। एबीसी प्रोग्राम के तहत पहली बार प्रति श्वान इतना भुगतान किया जा रहा है। पिछले वर्षों में 400 रुपए से 850 रुपए तक का भुगतान किया जाता रहा है।

अव्यवस्थाओं के लिए ये जिम्मेदार
विश्राम मीणा, आयुक्त: कई माह से पशु प्रबंधन शाखा के लिए निगम प्रशासन को उपर्युक्त अधिकारी नहीं मिल रहा है। सतर्कता शाखा के उपायुक्त नीलकमल मीणा को यह जिम्मेदारी दी गई है। आयुक्त का कहना है कि जब तक आरएएस नहीं आ जाते, तब तक इनको जिम्मेदारी दे रखी है।
डॉ. कमलेश मीणा: श्वान घर की जिम्मेदारी इनके पास है, लेकिन इन्होंने कभी निगरानी करने की जरूरत नहीं समझी। हैरिटेज निगम में वरिष्ठ पशु चिकित्सक का पद न होने के बाद भी ये यहां पर पिछले दो वर्ष से सेवाएं दे रहे हैं।

ये हो रहा
-श्वान को पकडऩे के दौरान कोई फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी नहीं की जाती।
-जहां से श्वानों को उठाया जाता है बधियाकरण के बाद वहां छोड़ा नहीं जा रहा।
-श्वान घर में भी निगरानी के लिए निगम की कोई टीम नहीं रहती।

व्यवस्थाएं करेंगे दुरुस्त
श्वान घर से संंबंधित कुछ शिकायतें मिली हैं। जल्द ही बैठक करूंगा और व्यवस्था को दुरुस्त करने का प्रयास करूंगा।
-विश्राम मीणा, आयुक्त