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स्कूलों में डमी एडमिशन का खेल, फीस 25 लेकिन वसूल रहे 55 हजार

राजधानी में ऐसे स्कूल भी चल रहे हैं, जिनके पास न पर्याप्त भवन हैं न ही शिक्षक है और ना ही कक्षाएं संचालित हो रही हैं। इन स्कूलों के रिकॉर्ड में बच्चे सैक़ड़ों मिल जाएंगे।

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जयपुर

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Vijay Sharma

May 25, 2023

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जयपुर। राजधानी में ऐसे स्कूल भी चल रहे हैं, जिनके पास न पर्याप्त भवन हैं न ही शिक्षक है और ना ही कक्षाएं संचालित हो रही हैं। इन स्कूलों के रिकॉर्ड में बच्चे सैक़ड़ों मिल जाएंगे। दरअसल, राजधानी में डमी एडमिशन का चलन बढ़ गया है। ऐसे मेे शहर में ऐसे कई स्कूल शुरू हो गए हैं, जो सिर्फ डमी एडमिशन ले रहे हैं। सत्र शुरू होने के साथ जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में ऐसे स्कूलों की शिकायतें आना शुरू हो गई हैं।

डमी के लिए दोगुने फीस लेते
इन स्कूलों की फीस भले ही 20 से 25 हजार रुपए है, लेकिन डमी एडमिशन के नाम पर 55 हजार रुपए तक वसूली की जा रही है। इसके एवज में छात्रों को स्कूल न आने की छूट दी जा रही है। बच्चों को सिर्फ परीक्षा के लिए स्कूल बुलाया जा रहा है। दरअसल, ये बच्चे इंजीनियरिंग, मेडिकल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग जाते हैं। ऐसे में से अ धिकतरय समय स्कूल की बजाय कोचिंग में ही निकाल रहे हैं। राजधानी में ऐसे छात्रों की संख्या करीब 20 से 25 हजार हैं।

राजस्थान के बाहरी राज्यों से आ रहे छात्र
स्कूलों की ओर से एडमिशन में हो रहे फर्जीवाड़े को देखते हुए राजस्थान के बाहरी राज्यों के बच्चे भी जयपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने आते हैं। ये स्कूलों में डमी एडमिशन ले रहे हैं। जयपुर में बिहार, गुजरात, यूपी तक के बच्चों ने स्कूलों में डमी एडमिशन ले रखे हैं। ये बच्चे 10वीं कक्षा के बाद ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर देते हैं। कोचिंग संस्थानों में एक से डेढ़ लाख रुपए तक खर्च करते हैं। इस तरह एक बच्चे की पढ़ाई में दो लाख रुपए तक खर्च किए जा रहे हैं।

स्कूल आना जरूरी, 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य
शिक्षा अ धिकारी राजेन्द्र शर्मा हंस के अनुसार किसी भी कक्षा में बच्चों की उपस्थिति 75 फीसदी तक होना अनिवार्य है। इससे कम उपस्थिति होने पर बच्चे को नोटिस दिया जाता है। बोर्ड परीक्षा में बच्चा नहीं बैठ सकता। वहीं, स्कूल में डमी एडमिशन नियमों के खिलाफ है। अगर शहर में डमी एडमिशन हो रहे हैं तो गलत है। शिकायत आने पर विभाग कार्यवाही कर सकता है।

फैक्ट फाइल
- 5 से 6 घंटे की क्लास चल रही कोचिंग में
- 50 से 55 हजार रुपए डमी एडमिशन के लिए जा रहे
- 1 लाख रुपए से अ धिक कोचिंग संस्थान शुल्क वसूल रहे
- 20 से 25 हजार छात्रों ने राजधानी में ले रखा स्कूलों में डमी प्रवेश

इसीलिए बढ़ रहे आत्महत्या के मामले
कोई भी छात्र जब 11 वीं और 12 वीं में आता है तो उसके लिए विषय नए होते हैं। जब तक वह स्कूल जाकर कक्षाएं अटेंड नहीं करेगा। वह विषयों को नहीं समझ पाएगा। यह भ्रम होता है कि कोचिंग में रहकर कक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी एक साथ हो सकती है। 11 वीं और 12 वीं पढ़ाई अलग होती है और प्रतियोगी परीक्षाओं की अलग। लेकिन छात्र कॉ म्पिटिशन की दौड़ में स्कूल छोड़ देते हैं। अंत में बच्चे स्कूल और कोचिंग के बीच सामंजस्य नहीं बैठा पाते। यही कारण है कि कोचिंग संस्थानों के छात्र आत्महत्या कर रहे हैं। समाज को यह मानसिकता बदलनी चाहिए। अन्यथा आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी होगी।
प्राे. एसएल शर्मा, समाजशास्त्र विभाग राजस्थान यूनिवर्सिटी


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