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सशक्तिकरण की मिसाल: राजस्थान का अनोखा बैंक, जहां हर तिजोरी की चाबी महिला के हाथ, अब तक करोड़ों का टर्नओवर

women empowerment : डूंगरपुर के इस बैंक ने न केवल आर्थिक स्वतंत्रता दी, बल्कि सामाजिक बदलाव की एक नई इबारत भी लिखी है।

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जयपुर

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Savita Vyas

Jun 25, 2025

महिला मिनी बैंक डूंगरपुर Social Media

महिला मिनी बैंक डूंगरपुर

सविता व्यास

जयपुर। डूंगरपुर जिले के सुदूर आदिवासी गांव बरबोदनिया में नारी शक्ति ने एक ऐसी आर्थिक क्रांति लिखी है, जो पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गई है। यहां न कोई भव्य इमारत है, न महंगी डिग्रियां, फिर भी महिलाओं के आत्मविश्वास और मेहनत से खड़ा 'महिला मिनी बैंक' करोड़ों का टर्नओवर कर रहा है। इस बैंक की हर चाबी महिलाओं के हाथ में है-कैशियर, मैनेजर से लेकर अध्यक्ष तक, सभी जिम्मेदारियां महिलाएं संभालती हैं। खास बात यह है कि पुरुषों का यहां खाता तक नहीं खुलता, क्योंकि यह बैंक सिर्फ और सिर्फ महिलाओं के लिए है।

बैंक यह उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपने दम पर आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं। इस बैंक ने न केवल आर्थिक स्वतंत्रता दी, बल्कि सामाजिक बदलाव की एक नई इबारत भी लिखी है।

1700 से अधिक महिलाएं जुड़ीं, कोई डिफॉल्टर नहीं

साल 2002 में सीमा भगत और गजरा एकोत ने इस क्रांति की नींव रखी। दोनों ने पहले एक महिला बचत समूह शुरू किया, जो छह महीने बाद महिला मिनी बैंक में तब्दील हो गया। आज इस बैंक में 1700 से अधिक महिला खाताधारक हैं, जिनमें 642 बचत खाते, 666 रेकरिंग डिपॉजिट (आरडी) और 429 फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) खाते शामिल हैं। बैंक ने अब तक 213 महिलाओं को 40 लाख रुपए से अधिक का ऋण वितरित किया है। इसकी कुल जमा राशि 2 करोड़ रुपए से ज्यादा है, और हर महीने औसतन 20 लाख रुपए का टर्नओवर होता है।

आधुनिकता और सशक्तिकरण का प्रतीक

अब यह बैंक एक पक्के भवन से संचालित होता है, जहां सभी कार्यप्रणालियां आधुनिक तरीके से चलती हैं। वर्तमान में शांतिदेवी पुंजोत इसकी अध्यक्ष हैं। यह बैंक केवल एक वित्तीय संस्था नहीं, बल्कि महिला शक्तिकरण का जीवंत प्रतीक है। यहां की महिलाएं न सिर्फ अपनी आर्थिक जरूरतें पूरी कर रही हैं, बल्कि अपने परिवार और समुदाय को भी मजबूत बना रही हैं।