
स्कूल शिक्षा में सुधार के लिए आरएससीईआरटी का गठन
जयपुर
राज्य में शिक्षा में सुधार की दिशा में सरकार ने एक ओर कदम उठाते हुए पूर्व प्राथमिक से लेकर सीनियर स्कूल के शिक्षकों के प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिए एक परिषद का गठन किया है। पहले प्राथमिक और माध्यमिक के लिए अलग—अलग व्यवस्था थी, अब सरकार ने राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद यानि की आरएससीईआरटी का गठन किया है। यह एक शैक्षिक प्राधिकरण के रूप में काम करेगी। शिक्षा विभाग की ओर से मानव संसाधन विकास मंत्रालय से मिले दिशा निर्देशों के आधार पर एसआईईआरटी का पुर्नगठन करते हुए आरएससीईआरटी का गठन किया है। परिषद् राज्य में एकेडमिक थिंक टैंक के रूप में शिक्षण, प्रशिक्षण और शोध का काम करेगी। शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी ने बताया कि आरएससीईआरटी राज्य में नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगी।
परिषद करेगी यह काम
परिषद राज्य में प्री-प्राईमरी से सीनियर सैकण्डरी और जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों (डाईट्स) के लिए पाठ्यक्रम निर्माण के साथ ही शिक्षक प्रशिक्षण के सतत मूल्यांकन और शिक्षण में शोध को बढ़ावा देने का काम करेगी। उन्होंने बताया कि राजस्थान की षिक्षा नीति को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के समानान्तर विकसित करने के लिए काम किया जाएगा। परिषद शैक्षिक प्राधिकरण के रूप में स्वायत्तशाषी परिषद् के रूप में काम करेगी।
39 साल बाद बदली व्यवस्था
राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (एसआईईआरटी) 39 साल बाद राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (आरएससीईआरटी) में तब्दील हुआ है। इसमें 60 फीसदी बजट केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य सरकार देगी। एसआईईआरटी निदेशक दिनेश कोठारी ने बताया कि अब पुस्तक लेखन, पाठ्यक्रम निर्माण, शिक्षक प्रशिक्षण, अनुसंधान समेत अन्य की रूपरेखा के साथ बजट भी परिषद ही निर्धारित करेगी। परिषद वृहद स्तर पर काम करने के लिए स्वतंत्र है। प्रदेश की सभी 33 डाइट्स का बजट भी परिषद ही जारी करेगी। परिषद शैक्षिक प्राधिकरण के रूप में स्वायत्तशाषी परिषद् के रूप में काम करेगी।
Published on:
18 Aug 2018 06:59 pm
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