
SMS Hospital: हार्ट ट्रांसप्लांट के 19 दिन बाद घर लौटा मरीज, अस्पताल में बंटी मिठाई
अस्पताल में भर्ती किसी मरीज की हालत गंभीर होने पर डॉक्टर्स के मौके पर नहीं पहुंचने के आरोपों से अब मुक्ति मिलेगी और मरीज को राहत भी। प्रदेश का सबसे बड़ा सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS Hospital) अब नई कवायद शुरू करने जा रहा हैं।
जिसके तहत अब अस्पताल (Hospital) में भर्ती किसी भी मरीज की हालत गंभीर हुई तो गंभीर मरीज को संभालने के लिए तुरंत स्पेशियलिस्ट डॉक्टर्स हाजिर होंगे। अस्पताल में 24 घंटे डॉक्टर्स की टीम मौजूद रहेगी। जिसमें कार्डियों,मेडिसिन से लेकर न्यूरो के डॉक्टर्स शामिल होंगे। यह इमरजेंसी टीम अस्पताल के कंट्रोल रुम से जुड़ी रहेगी।
वार्ड में किसी भी मरीज की हालत बिगड़ी तो इमरजेंसी कोड कंट्रोल रुम तक पहुंचेगा। जहां से टीम को मैसेज होने पर मरीज की जान बचाने के लिए यह टीम संबंधित वार्ड में पहुंच कर मरीज को तुरंत राहत पहुंचाएगी।
पुलिस के अल्फा बीटा की तर्ज पर होंगे इमरजेंसी कोड
पुलिस के वायरलैस सेट पर बजने वाले अल्फा बीटा गामा कोड की तरह की अस्पताल भी अपना इमरजेंसी कोड सिस्टम तैयार करने जा रहा हैं।
उदाहरण के तौर पर अगर एसएमएस अस्पताल के वार्ड एबी1 में भर्ती किसी मरीज को कार्डियक अरेस्ट होता है तो तुरंत इमरजेंसी कोड उदाहरण के तौर पर जैसे एबी1 कार्डियक बेड 24 कोड कंट्रोल रुम तक पहुचेगा। जिसके बाद कंट्रोल यही कोड इमरजेंसी टीम को देगा।
इससे तुरंत संबंधित हदय रोग विशेषज्ञ उस वार्ड में पहुंचेगा और मरीज की स्थिति को संभालेगा। कोड सिस्टम विकसित होने से मरीज को तुरंत सहायता उपलब्ध होगी। साथ ही पूरा मैसेज देने में लगने वाले समय,बेड नंबर आदि बताने में जो समय लगता था उसमें बचत होगी और स्पेशियलिस्ट डॉक्टर मरीज को सहायता दे सकेंगे।
अक्सर किसी भी वार्ड,आइसीयू में भर्ती मरीज की हालत गंभीर होने के बाद अगर मौत हो जाती है,तो अधिकत्तर परिजन डॉक्टर के मौके पर नहीं पहुंचने के आरोप लगाते हैं।
नर्सिंग कर्मचारियों पर भी अंतिम समय में मरीज को नहीं संभालने का आरोप लगता था। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि डॉक्टर के वार्ड में पहुंचने पर भी इस तरह के आरोप लगते रहते हैं।
अब नया कोड सिस्टम तैयार होने के बाद ना तो चिकित्सकों पर आरोप लगेगा और ना ही इमरजेंसी में मरीज को अधिक समय तक डॉक्टर का इंतजार करना होगा।
कोड मिलते ही इमरजेंसी टीम का डॉक्टर तुरंत संबंधित जगह पहुंचेगा और मरीज को वार्ड से आइसीयू,ऑक्सीजन,सीपीआर,वेंटीलेटर या कोई अन्य जीवन रक्षक दवा देनी होगी वह मरीज की स्थिति को उपलब्ध करवाएगा।
एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसीपल डॉ.राजीव बगरहट्टा का कहना है कि अभी इस प्लान के तहत कोडिंग को लेकर काम चल रहा है।
Published on:
20 Sept 2022 11:08 am
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