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राजस्थान ऊर्जा विकास निगम ( Rajasthan Urja Vikas Nigam ) की कार्यप्रणाली में आमूलचूल बदलाव ( radical change ) लाने की आवश्यकता है और अधिकारियों में सकारात्मक सोच के साथ काम करने की जरूरत हैं। बदली हुई परिस्थितियों व समय की मांग के अनुसार विभाग की रिस्ट्रक्चरिंग करते हुए अधिकारियों का कार्य विभाजन किया जाएगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा डॉ. सुबोध अग्रवाल ने कहा कि विभाग की समयानुकूल और पारदर्शी लिटिगेशन पॉलिसी तैयार की जाएगी, ताकि विचाराधीन प्रकरणों में समय पर जबाव दावे प्रस्तुत करने, प्रभावी तरीके से विभागीय पक्ष रखने और प्रकरणों को समयवद्ध निष्पादन की स्थिति में लाने की आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित हो सके। इससे विभागीय प्रकरणों की मोनेटरिंग व्यवस्था में भी सुधार होगा।
बिजली की मांग और आपूर्ति की स्थिति को देखते हुए बिजली खरीद की वैज्ञानिक प्रणाली विकसित करनी होगी, ताकि बिजली खरीद की लागत को युक्तिसंगत व लाभदायी बनाया जा सके। उन्होंने पीपीए से जुड़े प्रकरणों के समयवद्ध निस्तारण के निर्देश दिए। निगम में रिजल्ट ओरियंटेड कार्यप्रणाली विकसित होनी चाहिए। इसके लिए परंपरागत सोच व कार्यप्रणाली बदलनी होगी, ताकि कार्य निष्पादन में अनावश्यक देरी के स्थान पर सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सके। उन्होंने विभागीय बैठकों के निर्णयों को समाहित करते हुए अधिकतम तीन दिवस में मिनिट्स जारी करने के निर्देश दिए और निर्णयों की समययवद्ध क्रियान्विति को कहा। ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध संचालक भास्कर ए. सावंत ने बताया कि बिजली की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के प्रयासों का ही परिणाम है कि प्रदेश में मांग के अनुसार बिजली की उपलब्धता बनी हुई है। विभाग ने बिजली निगमों की मोनेटरिंग व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
Published on:
06 Jan 2022 05:43 pm
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