
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सख्ती के बाद भी जयपुर शहर में 15 साल पुराने पेट्रोल व 10 साल पुराने डीजल वाहन खुले में दौड़ रहे हैं। परिवहन विभाग अभी तक जिले के सभी नॉन ट्रांसपोर्ट और ट्रांसपोर्ट व्हीकल का सत्यापन भी नहीं कर पाया है। पिछले महीने हाईपावर कमेटी की बैठक के बाद ये सच्चाई सामने आई।
परिवहन विभाग की ओर से बताया गया था कि जयपुर जिले में 29 हजार 501 नॉन ट्रांसपोर्ट व्हीकल चिन्हित किए गए हैं जो 15 साल पुराने हैं। इनमें से 15 हजार 497 वाहनों का रजिस्ट्रेशन निरस्त किया गया है। जबकि 11 हजार 147 ट्रांसपोर्ट व्हीकल के परमिट रद्द किए गए हैं। विभाग ने फरवरी में टीमें गठित कर इस तरह के वाहनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। ग्रीन ट्रिब्यूनल ने बढ़ते प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए 15 साल पुराने वाहनों के संचालन रोकने के निर्देश दिए थे।
मंत्रालय ने दिए थे निर्देश
केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने इस संबंध में सभी राज्यों के परिवहन विभागों को निर्देश जारी किए थे। राजस्थान परिवहन विभाग ने फरवरी में ही वाहनों पर रोक लगा दी थी और तीन टीमों का गठन किया था। इन टीमों को १५ साल पुराने वाहनों के रजिस्ट्रेशन करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद जिले के सभी परिवहन कार्यालयाें ने कार्रवार्इ शुरू की।
पहले दिल्ली में लगार्इ थी राेक
दिल्ली में १५ साल पुराने पेट्राेल व १० साल पुराने डीजल वाहनाें पर राेक लगार्इ गर्इ थी। इसे लेकर याचिका भी लगार्इ गर्इ, लेकिन इसे काेर्ट ने खारिज कर दिया। जिसके बाद परिवहन मंत्रालय ने सभी राज्याें काे पुराने वाहनाें के रजिस्ट्रेशन पर राेक लगाने के निर्देश जारी किए। यही नहीं राज्याें काे अपने हिसाब से नियम बनाने के लिए भी कहा गया था। कुछ राज्याें में इसका पालन करते हुए नियम भी बनाए हैं। हालांकि जयपुर में अभी सैंकड़ाे पुराने वाहन सड़काें पर दाैड़ रहे हैं। विभाग का मानना है कि दाेबारा रजिस्ट्रेशन के लिए वाहन नहीं आएगा ताे रजिस्ट्रेशन स्वतः ही निरस्त हाे जाएगा।
Published on:
05 May 2018 08:25 pm
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