world cancer day 2022:
आज विश्व कैंसर दिवस है। इस साल डब्ल्यूएचओ की ओर से यह ‘क्लोज द केयर गेप’ थीम पर मनाया जा रहा है। इसक मकसद कैंसर पेशेंट की देखभाल में असमानताओं को समझने की ओर कदम बढ़ाने से है। इस समय अकेले भारत में हर साल 20 लाख कैंसर के नए मरीज मिल रहे हैं, जबकि राजस्थान में 50 हजार कैंसर रोगी हर साल जुड़ जाते हैं। जागरूकता की कमी के चलते इन रोगियों की पहचान, इलाज और जान बचाना और मुश्किल होता जा रहा है। हालांकि तकनीक ने अब इलाज को पहले से आसान बनाया है, लेकिन स्टेज 3 या 4 में डॉक्टर के पास पहुंचने पर रोगी के लिए यह इलाज भी कारगर साबित नहीं होता। विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर की समय पर पहचान की जागरूकता भी लोगों में हो तो 40 फीसदी मामलों में मरीजों को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। वहीं लाइफस्टाइल में बदलाव कर भी कैंसर से बचा जा सकता है।
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धूम्रपान करना बंद करें
हेमेटो ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. दिवेश गोयल का कहना है कि मुंह के कैंसर और फेफड़े का कैंसर सबसे आम प्रकार के कैंसर हैं, जो आमतौर पर पुरुष रोगियों में देखे जाते हैं। इसका प्राथमिक कारण धूम्रपान और शराब का सेवन हैं। धूम्रपान न करने वाले रोगी ज्यादातर प्रदूषण, पर्यावरण परिवर्तन, विकिरण के संपर्क में आने और निष्क्रिय धूम्रपान जैसे कारकों के कारण प्रभावित होते हैं। लगभग 20-25 प्रतिशत मामले सिर और गर्दन के होते हैं, जबकि लगभग 25 प्रतिशत मामले फेफड़ों के कैंसर, 15 प्रतिशत आंतों और पेट के कैंसर के होते हैं। जब मुंह के छाले ठीक नहीं होते हैं, तो सतर्क हो जाना चाहिए।
कैंसर से डरें नहीं, इलाज करवाएं
ओंकोलॉजिस्ट डॉ. दीपक कुमार शुक्ला कहते हैं कि कैंसर का निदान संभव है, लेकिन कई मरीजों को समय पर इलाज ना मिलने की बड़ी वजह उनका डर है। कैंसर रोगी डर की वजह से कैंसर विशेषज्ञ से इलाज ना लेकर दूसरे इलाज का रूख कर लेते हैं। इस कारण उनमें कैंसर लाइलाज हो जाता है। जबकि आखिरी स्टेज तक कैंसर को काबू में किया जा सकता है और उम्र को कुछ साल बढ़ाया जा सकता है। पूरी तरह कैंसर का इलाज तभी संभव है, जब डरें नहीं और समय पर इलाज लिया जाए। इस बीमारी को स्वीकार करें और लड़े।
नई तकनीकों से हो रहा इलाज
रेडिएशन थैरेपी विशेषज्ञ डॉ. डीपी सिंह का कहना है कि अब नई तकनीक में थ्रीडी थैरेपी भी है। इसमें सिर्फ कैंसर कोशिकाओं को टारगेट कर रेडिएशन दिया जाता है। इससे अन्य कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुंचता है। उनका कहना है कि कैंसर मरीजों में 40 प्रतिशत मरीजों की मौत का कारण तम्बाकू होता है। तम्बाकू से मुंह का कैंसर बढ़ता जा रहा है। वहीं अत्यधिक शराब के सेवन से 5 प्रतिशत कैंसर मरीजों की मौत होती है। हर तरह के कैंसर में आज भी कीमोथैरेपी सर्वाधिक प्रचलित है। वहीं आधुनिक उपकरणों ने इलाज को आसान बनाया है, लेकिन जरूरी है कि कैंसर का अर्ली स्टेज में पता लगाया जा सके।
दोगुनी होगी मरीजों की संख्या
कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय यादव का कहना है कि कैंसर के मरीज अब बढ़ते जा रहे हैं। डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि भारत में 2025 तक कैंसर मरीजों की संख्या दोगुनी हो जाएगी। इसका बड़ा कारण कैंसर के प्रति जागरूकता का ना होना है। उनका कहना है कि कुछ साल पहले तक पुरुषों में लंग्स कैंसर सबसे ज्यादा देखा जाता था, अब मुंह का कैंसर पहले स्थान पर है। इसका कारण बड़े स्तर पर तम्बाकू का सेवन हो रहा। युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। महिलाओं में सबसे ज्यादा केस सर्विक्स कैंसर के आते हैं। 5 प्रतिशत महिला मरीजों में कैंसर आनुवंशिक कारणों से भी होता है। अर्ली डायग्नोसिस ही कैंसर से जान बचा सकता है।