भारत ही नहीं पूरे विश्व में राजस्थान अपने स्थापत्य और गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है। यहां का स्थापत्य और वास्तुकला जैसे. महल,गढ़, किले, मंदिर, बावडिय़ा, बाज़ार, भवन इतने सुंदर व अद्वितीय हंै कि इनका दर्शन अ’न्यत्र कहीं नहीं होता। हमें जो विरासत मिली है यह पूरे राज्य में है। इनमें से कुछ तो इतनी कलात्मक हैं कि देखने वाले का मन मोह लेती है। यह कहना है लक्ष्य भारद्वाज का जिनकी पेंटिंग प्रदर्शनी ‘विरासत जवाहर कला केंद्र की सुरेख आर्ट गैलेरी में शुरू हुई है। इस प्रदर्शनी में उन्होंने तकरीबन ढाई से तीन साल के समय में बनाई गई पेंटिंग्स प्रदर्शित की हैं।
अपने गुरु गोपाल स्वामी खेतांची ने पेंटिंग सीख रहे लक्ष्य यू तो कई कला मेलों में अपने हुनर का परिचय दे चुके हैं लेकिन जेकेके में पहली बार उन्होंने अपनी पेंटिंग की सोलो प्रदर्शनी आयोजित की है।
लक्ष्य ने कहा कि आज हज़ारों वर्षों के बाद समय के प्रभाव से इनमें से कई इमारतें जीर्ण-शीर्ण अवस्था में आ गई हैं। संभवतया आने वाले समय में इनका अस्तित्व ही समाप्त हो जाए। आज ज़रूरत हैं कि हम पुरानी स्थापत्य तकनीकी और सौंदर्यशाली विरासत की देख रेख करें जिससे कि आने वाले समय में हमारी पीढिय़ां भी अपने इतिहास और समृद्ध स्थापत्य से रूबरू हो सकें।