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नौकरी के नाम पर ठगी का मामला: पूरी तैयारी से लेते इंटरव्यू, ताकि नहीं हो किसी को शक

जालूपुरा थाना पुलिस की गिरफ्त में आए कृषि एवं पशुपालक निगम में नौकरी लगाने का झांसा देकर ठगी करने वालों में एक दर्जन से अधिक लोग शामिल हो सकते है।

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Fake job racket

जयपुर। जालूपुरा थाना पुलिस की गिरफ्त में आए कृषि एवं पशुपालक निगम में नौकरी लगाने का झांसा देकर ठगी करने वालों गिरोह के नेटवर्क में एक दर्जन से अधिक लोग शामिल हो सकते है। इन्हें पकडऩे के लिए पुलिस ने स्पेशल टीमों का गठन किया है और आरोपितों के छिपे होने के संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। इधर, नीलम होटल से गिरफ्तार किए तीन आरोपित मनीष पांचाल, समीर दीक्षित और दीपक वर्मा को पुलिस ने शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया। यहां से कोर्ट ने तीनों को दो दिन के रिमांड पर सौंप दिया। आवेदकों को शक न हो, इसके लिए आरोपित वेल अप-टू-डेट होकर साक्षात्कार लेते थे। पुलिस की टीम अन्य आरोपितों की तलाश के लिए इंदौर रवाना हो चुकी है। जांच अधिकारी एसआई जगदीश रॉय ने बताया कि कंपनी के निदेशक अविनाश अजमेरा और पंकज वर्मा हैं, जो इस पूरे मामले के सूत्रधार हंै। इन्होंने अपनी फर्म में मनीष पांचाल, समीर दीक्षित एवं दीपक वर्मा सहित अन्य लोगों को 20 हजार रुपए महीने पर नौकरी पर रखा है। आरोपितों के खिलाफ जयपुर में डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों ने मुकदमा दर्ज कराया है।

एक टीम में 3 लोग, लेते थे साक्षात्कार
आरोपितों ने बताया कि कंपनी के निदेशकों ने तीन-तीन लोगों की टीमें बना रखी हैं, जो मध्यप्रदेश और बिहार में आवेदकों को बुलाकर उनका साक्षात्कार लेते थे। पकड़े गए तीनों आरोपित जयपुर से पहले कुछ दिन कोटा में साक्षात्कार लेकर आए हैं। जयपुर के बाद इन तीनों को जोधपुर जाना था। पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि आरोपितों की टीमों ने मध्यप्रदेश और बिहार में साक्षात्कार पूरे कर लिए हैं तथा उत्तर प्रदेश में इनके फर्जी साक्षात्कार चल रहे हैं। इसके लिए पुलिस उप्र और बिहार पुलिस के भी सम्पर्क में है।

पहले बात हुई फिर बंद कर लिया फोन
पुलिस ने बताया कि कम्पनी के निदेशक अविनान से फोन पर बात हुई थी और कम्पनी के कागज देखने की बात पुलिस ने कही, उसके बाद उसने फोन बंद कर लिया। पुलिस का कहना है कि आरोपितों ने मध्यप्रदेश की ही नगर-पालिका से शॉप एक्ट का सर्टिफिकेट ले रखा है, जो इंदौर तक ही सीमित है। इसमें साफ लिखा है कि वह बीज और दवाई के थोक विक्रता से संबंधित है।

हर आवेदक को देते दो से 5 मिनट का समय
पुलिस की मानें तो आरोपित साक्षात्कार लेने के लिए पूरी तैयारी के साथ आते थे। हर आवेदक को दो से पांच मिनट का समय देते। किसी को शक न हो, इसके लिए आरोपित वेल अप-टू-डेट होकर पहुंचते थे। इंटरव्यू के दौरान जो निर्धारित समय से देरी से पहुंचता तो उसका नम्बर सबसे बाद में आता। आरोपितों ने इंटरव्यू के लिए टारगेट भी फिक्स कर रखा था कि उन्हें आधे से एक घंटे में 25-30 लोगों का इंटरव्यू लेना है। क्राइम ब्रांच टीम के एसआई धर्मसिंह ने बताया कि राजस्थान के विभिन्न राज्यों से आए आवेदकों में अकेले जयपुर शहर के 200 लोग शामिल है। आवेदकों के फर्जीवाड़े का शक होने पर इन्होंने ही जयपुर क्राइम ब्रांच टीम को मामले की सूचना दी।

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