
निशि, जयपुर . राजस्थान किले—महलों का राज्य कहा जाता है। यहां भरपूर संपदा और मॉनूमेंटस हैं। साथ ही यह प्रदेश ऐतिहासिक मंदिरों व उनमें मौजूद प्रतिमाओं के लिए भी प्रसिद्ध है। आज हम आपको बता रहे हैं एक ऐसे मंदिर के बारे में जो करीब 250 साल पहले बना और श्री हरि के 24 अवतार एक साथ स्थापित किए गए।
यह मंदिर राजधानी में कल्याण जी के रास्ते में स्थित है। वैसे तो शहरवासी रोजाना पूजन करने आते ही हैं, लेकिन राजस्थानभर के श्रद्धालु भी खास वजह से आते हैं। इस मंदिर की अत्यधिक मान्यता इसलिए है कि भगवान विष्णु के यहां श्रीकृष्ण समेत 22 नहीं बल्कि 24 अवतारों के रूप विराजमान हैं। यानी, कलयुग के अंत में होने वाला भगवान कल्कि का अवतरण भी यहां प्रतिमा के रूप में पूजा जाता है।
बावड़ी से उभर कर आई प्रतिमा
पत्रिका जर्नलिस्ट को मंदिर प्रबंधक ने बताया कि प्रतिमा एक बावड़ी से आई। दरअसल जयपुर—दौसा में आज भी कई बावड़ी सैकड़ों से मौजूद हैं। ये ऐसी इमारते होती हैं जो गहराई में अनाप भी सकती हैं। ये किले जैसी प्रतीत होती हैं। मान्यता है कि मंदिर में मौजूद ये प्रतिमा एक साक्षात मूर्ति है। जब इसे स्थापित करने को ले जाया जा रहा था तो ये कल्याण जी के रास्ते में रुक गई। आगे नहीं ले जाया जा सका। फिर कल्याण जी के रास्ते में ही विराज मान किया गया और नाम भी श्री कल्याण जी रखा गया।
आखातीज और चेत्र की पूर्णिमा को होते है पूरे दर्शन
आखातीज के दिन मूर्ति को पूरे चन्दन से सजाया जाता है। उसी दिन 24 अवतार के दर्शन होते है साथ ही चेत्र की पूर्णिमा को दूध से अभिषेक किया जाता है।और नये वस्त्र धारण किये जाते हैं। इस पर्व पर सवाईमाधोपुर, करौली, अजमेर तक के भक्त पहुंचते हैं।
Published on:
22 Dec 2017 04:05 pm
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