पीजी, हॉस्टल और घर में अकेली या जॉब करने वाली लड़कियों में फास्ट फूड (fast food) का चलन ज्यादा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, लगातार क्लास अटेंड करने और पढ़ाई के प्रति अधिक प्रतिबद्धता से फास्ट फूड को दे रही तरजीह
जयपुर. घर से बाहर रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी या ट्यूशन, पढ़ाई के प्रति अधिक प्रतिबद्धता, समय बचाने और लंबी कक्षाओं के कारण कई लड़के-लड़कियां और कामकाजी महिलाएं में जंक फूड की आदत की आदत बढ़ रही है। फेटी लीवर बीमारी का यह एक बड़ा कारण है। सवाई मानसिंह अस्पताल के गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग की ओपीडी में आने वाले 40 फीसदी मरीज इससे ग्रस्त होकर पहुंच रहे हैं। इनकी उम्र करीब 16 से 25 वर्ष तक है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल के अनुसार भारत में 32 प्रतिशत तक लोगों को नॉन एल्कोहल फैटी लिवर बीमारी हो सकती है। शुरुआत में इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, जिसकी वजह से अनदेखी ज्यादा होती है, लेकिन कुछ समय बाद पेट में पानी भरने, खून की उल्टी होने, लिवर कैंसर जैसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। कई मरीजों में लिवर ट्रांसप्लांट की नौबत आ जाती है।
यह मिल रहे लक्षण
पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में दर्द, थकान, भूख न लगना, कमजोरी, जी मिचलाना, लिवर का आकार बढऩा, गर्दन और बाहों के नीचे की त्वचा में गाढ़े रंग का मेल जमा होना आदि। फैटी लिवर दो प्रकार का होता है। एल्कोहोलिक फैटी लिवर की अवस्था शराब पीने वालों में होती है। गैर एल्कोहोलिक फैटी लिवर शराब नहीं पीने वालों लोगों में होता है।
संतुलित लें खान-पान
इस बीमारी से निपटने के लिए संतुलित भोजन और नियमित एक्सरसाइज व योगा जरूरी है। डाइट मेें फास्ट फूड, जंक फूड को स्थान नहीं दें। खासतौर पर क्लासेज के दौरान इससे दूरी बनाए। फाइबर, वसा, प्रोटिन युक्त भोजन करें। वजन को भी नियंत्रित रखें।
-डॉ. सुधीर महर्षि, सहआचार्य, गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग
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फेक्ट फाइल
- एसएमएस ओपीडी में रोजाना 5 से 7 लड़कियां फैटी लिवर से ग्रसित होकर आ रही
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल के अनुसार 9 से 32 प्रतिशत लोगों को नॉन एल्कोहल फैटी लिवर
- जांच केन्द्रों पर 50 लोगों की जांच में 5 से 10 में फैटी लिवर
- 70 से 80 प्रतिशत लड़कियों की पहली पसंद फास्ट फूड
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टॉपिक एक्सपर्ट :
जंक फूड की बढ़ती प्रवृत्ति से बढ़ रहा फैटी लिवर
जंक फूड, मोटापा, व्यायाम में कमी, पैदल नहीं चलकर वाहन से चलने सहित अधिक मांसाहार से फैटी लिवर की समस्या बढ़ रही है। यह खास तौर पर उन युवाओं के लिए चिंताजनक है, जो अकेले रह रहे हैं और नियमित भोजन की सहज उपलब्धता नहीं होने पर जंक फूड खाने की आदत बना बैठे हैं। फैटी लिवर से पता चलता है कि उस व्यक्ति के शरीर में फैट जमा होना शुरू हो गया है। समय पर उसे नियंत्रित नहीं किया गया तो आगे चलकर वह लिवर सिरोसिस का रूप ले सकता है। मधुमेह के बाद सबसे अधिक मामले लिवर में गड़बड़ी और फैटी लिवर के हैं। लक्षणों से शुरुआती दौर में ही हम इस बीमारी को पहचान सकते हैं और एहतियात बरतकर ठीक कर सकते हैं। फैटी लीवर के कारण भविष्य में डायबिटीज, हार्ट डिजीज, कैंसर, स्ट्रोक और किडनी की बीमारियां हो सकती हैं।
डॉ. रमेश रूपरॉय, पूर्व विभागाध्यक्ष, गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी, एसएमएस मेडिकल कॉलेज