
Supreme Court फोटो-पत्रिका
जयपुर: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर बेंच) के अंतरिम आदेश पर स्टे लगा दिया है। हाईकोर्ट ने नेशनल और स्टेट हाईवे से 500 मीटर के दायरे में स्थित 1,102 शराब की दुकानों जिनमें नगर निगम और शहरी स्थानीय निकायों की सीमाओं के भीतर वाली दुकानें भी शामिल हैं उन्हें हटाकर स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था।
राजस्थान सरकार और शराब लाइसेंस धारकों ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने पक्षकारों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम स्टे लगा दिया। कोर्ट ने कहा कि आगे पक्षकारों के पूर्ण बयानों के बाद मामले की सुनवाई होगी।
राजस्थान सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने तर्क दिया। उन्होंने कहा, हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले तमिलनाडु राज्य बनाम के. बालू के बाद जारी बाध्यकारी स्पष्टीकरणों के विपरीत 500 मीटर की कठोर मनाही दोबारा लागू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के 31 मार्च 2017, 11 जुलाई 2017 और 23 फरवरी 2018 के आदेशों के बाद मूल निर्देशों को शिथिल किया था। उन्होंने यह भी दलील दी कि अनुच्छेद-226 के तहत हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अनुच्छेद-141 के तहत घोषित कानून को नजरअंदाज नहीं कर सकता और न ही राज्यों को दी गई विवेकाधीनता को सीमित कर सकता है। शराब लाइसेंस धारकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और नवीन पाहवा ने भी यही चुनौतियां उठाईं। उनकी याचिकाओं को राज्य की याचिका के साथ जोड़कर सुनवाई की गई।
राजस्थान हाईकोर्ट ने 24 नवंबर 2025 को अंतरिम फैसला दिया था। जोधपुर बेंच में जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संजीत पुरोहित ने कन्हैया लाल सोनी और अन्य बनाम राजस्थान राज्य व अन्य मामले में सुनवाई की। हाईकोर्ट ने राज्य को नेशनल और स्टेट हाईवे से 500 मीटर के दायरे में स्थित सभी शराब की दुकानों की पहचान करने के निर्देश दिए थे। साथ ही इन दुकानों को हटाने और स्थानांतरित करने के लिए भी कहा गया था।
हाईकोर्ट ने कहा था कि नगर विस्तार को सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा मानदंडों को कमजोर करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने हाईवे के पास शराब की उपलब्धता से बढ़ते सड़क हादसों पर गहरी चिंता जताई। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत लोक सुरक्षा और हादसों के चलते 2,100 करोड़ के राजस्व नुकसान का जिक्र किया था। इस संबंध में निर्देशित किया गया था कि सभी ऐसी दुकानों को निर्धारित समय सीमा में स्थानांतरित करने और अनुपालन शपथपत्र दाखिल किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश पर रोक लगाकर राज्य सरकार और लाइसेंस धारकों को अंतरिम राहत दी है।
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Updated on:
19 Jan 2026 05:20 pm
Published on:
19 Jan 2026 05:20 pm
