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करवा चौथ: जीवनसाथी की ‘सलामती’ संग सुहागिनों को भी ‘सेहतमंद’ बनाता है व्रत

व्रत का न केवल धार्मिक महत्त्व, स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद

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जयपुर

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Savita Vyas

Oct 12, 2022

करवा चौथ 2022: जीवनसाथी की 'सलामती' संग सुहागिनों को भी 'सेहतमंद' बनाता है व्रत

करवा चौथ 2022: जीवनसाथी की 'सलामती' संग सुहागिनों को भी 'सेहतमंद' बनाता है व्रत

जयपुर। करवा चौथ का पर्व कल है। इस दिन का इंतजार सालभर सुहागिन महिलाओं को रहता है। पति की लंबी उम्र की कामना को लेकर सुहागिन महिलाएं निराहार रहकर करवा चौथ व्रत का व्रत रखती हैं। रात में चांद के दर्शन करने के बाद ही सुहागिनें व्रत खोलती हैं। करवा चौथ का व्रत जीवनसाथी की सलामती के लिए रखा जाता है। वहीं, आयुर्वेद के मुताबिक व्रत रखने से महिलाओं की सेहत अच्छी रहती है। शरद ऋतु के दौरान शरीर में पित्त बढ़ता है। इससे होने वाली बीमारियों से व्रत रखकर बचा जा सकता है। व्रत में महिलाएं दिनभर बिना पानी पिए रहती हैं और रात में मिट्टी के बर्तन से पानी पीकर व्रत खोलती है। ऐसा करने से मेटाबॉलिज्म बढ़ता है। इससे अच्छे बैक्टेरिया का निर्माण होता है. ये आंतों को स्वस्थ रखने का काम करता है. ये गट की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। शरीर से टॉक्सिन बाहर निकलने में मदद मिलती है। शरीर में मौजूद फैट एनर्जी में बदल जाता है, जिससे वजन घटाने में भी मदद मिलती है।

आज मेहंदी लगाएंगी सुहागिन महिलाएं
सुहाग की रक्षा का पर्व करवा चौथ सिद्धि-व्यातिपात योग व कृतिका-रोहिणी नक्षत्र सहित अन्य योग संयोगों में गुरुवार को मनाया जाएगा। सुहागिनें अखंड सुहाग के लिए निराहार रहकर व्रत रखेंगी। कुछ जगहों पर महिलाएं वीडियो कॉल के जरिए पति के दर्शन कर व्रत खोलेंगी, तो पति भी व्रत रखकर पत्नी का साथ देंगे। आज सुहागिनें मेहंदी रचाएंगी व गुरुवार को 16 शृंगार कर बडे़-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेंगी। कथा सुनने के साथ ही भगवान गणेश, चौथ माता और फिर चंद्र देव की पूजा करेंगी। उद्यापन में सुहाग का सामान देने के साथ ही, 13 महिलाओं को भोजन करवाया जाएगा। इससे पूर्व बाजारों में मिट्टी व चीनी के करवों की खरीदारी परवान पर है।

पति की दीर्घायु के लिए रखती हैं निर्जल व्रत

ज्योतिषाचार्य पं.राजेंद्र शर्मा ने बताया कि करवा चौथ का व्रत सुहागिन और अविवाहित स्त्रियां पति की मंगल कामना एवं दीर्घायु के लिए निर्जल रखती हैं। इस दिन न केवल चंद्र देवता की पूजा होती है, अपितु शिव-पार्वती और कार्तिकेय की भी पूजा की जाती है। इस दिन विवाहित महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए गौरी पूजन का भी विशेष महत्व माना जाता है। हालांकि शुक्र ग्रह के अस्त रहते हुए नए व्रत की शुरुआत और अंत यानी उद्यापन नहीं किया जाता है।

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