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बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा चीनी फिल्म ने सरकार पर दागे कई सवाल

आजकल किसी हॉलीवुड या बॉलीवुड फिल्म की नहीं, बल्कि एक चाइनीज फिल्म की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। यह फिल्म है डाइंग टू सवाईव।

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जयपुर

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Kiran Kaur

Jul 21, 2018

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बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा चीनी फिल्म ने सरकार पर दागे कई सवाल

दुनियाभर के सिनेमा में वैसे तो हर रोज कई फिल्में बनती हैं लेकिन चंद या कहें कि एक से दो फिल्में ही सालभर में ऐसी आती हैं, जो पूरे सिस्टम या समाज को आईना दिखा देती हैं। रंग दे बसंती, थ्री इडियट्स, हिंदी मीडियम ऐसी ही बॉलीवुड फिल्मों के उदाहरण हैं लेकिन आजकल किसी हॉलीवुड या बॉलीवुड फिल्म की नहीं, बल्कि एक चाइनीज फिल्म की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। यह फिल्म है डाइंग टू सवाईव। असल में यह एक व्यापारी की असल जिंदगी पर आधारित कहानी है, जो ल्यूकीमिया का मरीज होता है और अपने व अन्य मरीजों के लिए भारत की सीमा के पास से कैंसर की दवाओं की तस्करी करता है। अंतत: वह पकड़ा जाता है और उसे पांच साल की जेल हो जाती है। ये फिल्म बीते पांच जुलाई को रिलीज हुई थी और जबरदस्त हिट साबित हुई। यह अभी तक 335 मिलियन डॉलर से अधिक का कारोबार कर चुकी है। लेकिन इसकी लोकप्रियता सिनेमाघरों से ज्यादा इंटरनेट पर है क्योंकि इसके दर्शक अब चीन में कैंसर के इलाज और दवाओं की उपलब्धता पर जमकर बहस कर रहे हैं। साथ ही कैंसर की महंगी दवाओं की कीमत कम करने की भी मांग करने लगे हैं। ट्विटर जैसी एक चीनी साइट वेबो पर एक पेज भी इस फिल्म को समर्पित कर बनाया गया है, जिस पर अभी तक १५0 करोड़ से ज्यादा यूजर्स विजिट कर चुके हैं। खास बात यह है कि फिल्म काफी कम बजट में बनी है।
कुछ दिन पहले ही आयातित दवाओं पर बढ़ा था टैरिफ
कैंसर चीन में होने वाली सबसे गंभीर बीमारी है, जिसकी वजह से लगभग 30 लाख लोग हर साल इस देश में मर जाते हैं। काफी कम खर्च में बनी इस फिल्म ने चीन के लोगों को आंदोलित कर दिया है और वे सरकार की ओर से स्वास्थ्य तंत्र में खामियों पर सवाल दाग रहे हैं। हालांकि चीन में 95 फीसदी आबादी के पास किसी न किसी तरह का हेल्थ इंश्योरेंस है लेकिन कई प्रकार की विशेष दवाइयां या कुछ खास तरह के रोगों में प्रयोग होने वाली मेडिसिन इसके अंतर्गत नहीं आती हैं और मरीज की जेब पर काफी भारी पड़ती हैं। ऐसे में किसी रोग से पीडि़त व्यक्ति और उसके परिवार को मानसिक व आर्थिक दबाव झेलना पड़ता है। यह फिल्म ऐसे समय में आई है, जब एशिया-प्रशांत व्यापार समझौते के तहत चीन में कैंसर की आयातित दवाओं पर लगने वाले टैरिफ को एक जुलाई से बढ़ा दिया गया था।
प्रधानमंत्री ने हर संभव मदद करने को कहा
इस फिल्म पर जमकर हुई बहस के बाद चीन के प्रधानमंत्री ली केखियांग ने एक बैठक बुलाकर मंत्रियों से कैंसर के मरीजों की हर संभव मदद करने की बात कही। हालांकि उन्होंने इस फिल्म का नाम लिए बिना ही अपने नेताओं से कहा कि कैंसर की सभी प्रकार की दवाएं जरूरतमंदों को यथासंभव और उचित मूल्यों पर मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि हमें यह समझना होगा कि अगर किसी परिवार में कोई कैंसर का मरीज होता है तो उन्हें इलाज के लिए अपनी बरसों की कमाई खर्च करनी पड़ती है और देश में किसी के साथ ऐसा हो, ऐसा हम नहीं होने देना चाहते। कैंसर आजकल एक गंभीर समस्या बन गया है और लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में बतौर जनता के नुमाइंदे हमारा यह फर्ज है कि हम उनकी हर संभव मदद करें।
झुकी सरकार! कैंसर दवाओं पर जीरो टैरिफ की हुई घोषणा
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चाणिंग के अनुसार, हमने आयात बढ़ाने के लिए पहल की है। कार, उसके भागों और अन्य घटकों सहित दैनिक आवश्यकताओं के लिए बड़े मार्जिन के साथ आयात शुल्क कम किया है। इसके अलावा कैंसर संबंधित दवाओं के लिए जीरो टैरिफ यानी शून्य शुल्क को अपनाया है। इसी के साथ समझौते के अन्य सदस्य राष्ट्र जैसे भारत, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, बांग्लादेश और लाओस 10,300 से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ कटौती करने के लिए सहमत हो गए हैं। सरकार इस पर भी विशेष ध्यान दे रही है कि चिकित्सा लागत नए शून्य शुल्क को प्रतिबिंबित करे और डॉक्टरों की फीस व दवाओं की कीमतों को भी कम करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। अब सरकार को लगने लगा है कि मजबूत फार्मास्यूटिकल ट्रेड के जरिए ही देश के लोगों को स्वस्थ बनाए रखा जा सकता है।

बॉक्स ऑफिस पर वाहवाही लूटने वाली फिल्म डाइंग टू सर्वाइव अब चीन में कैंसर की दवाओं के दाम कम कराने में बड़ी भूमिका निभा रही है। फिल्म की रिलीज के कुछ हफ्तों बाद, अमरीकी फार्मास्यूटिकल जाइंट फाइजर इंक ने चीन में दवा की कीमतों को कम करने का फैसला किया है और कुछ में 10.2 फीसदी की कमी भी कर दी है। इसे फिल्म से जुड़े लोग एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रहे हैं। डाइंग टू सर्वाइव एक कॉमेडी ड्रामा फिल्म है। इसके निर्देशक नेव मुए हैं और यह उनकी पहली फीचर फिल्म है। फिल्म के हीरो जू जेंग ही इसके प्रोड्यूसर भी हैं। भारतीय अभिनेता शाहबाज खान ने भी इस फिल्म में भूमिका निभाई है।
चीन में अमीर तो हेल्थ इंश्योरेंस आदि का लाभ उठा लेते हैं लेकिन ग्रामीण आबादी को अपनी केयर के लिए काफी खर्चा उठाना पड़ता है। यही वजह रही कि फिल्म आम से खास, हर व्यक्ति के साथ कनेक्ट कर पाई और हिट साबित हुई।
यह फिल्म चीन के उस चेहरे को भी उजागर करती है, जहां पर लोगों को अपनी बात कहने की आजादी बहुत कम है, ताकि वे सरकार के गलत निर्णयों को प्रभावित न कर सकें।
यहां के नेता भी अपने नागरिकों को सुनना पसंद नहीं करते लेकिन जब इस फिल्म ने इतना बड़ा मैसेज देश को देना शुरू कर दिया तो हर कोई बुलंद आवाज में अपनी बात रखने लगा।
आलोचकों ने भी की है फिल्म की जमकर तारीफ
जू जेंग चीन में एक लोकप्रिय अभिनेता हैं, जिन्होंने इस फिल्म में उस व्यापारी मिस्टर लू की भूमिका निभाई है, जो ल्यूकीमिया का मरीज है और दवाओं की तस्करी करते समय पकड़ा जाता है। इस फिल्म का विलेन फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्रीज को दिखाया गया है। इस फिल्म की आलोचकों ने भी जमकर तारीफ की है। इस फिल्म की तुलना हाल में रिलीज हुई असुरा फिल्म से की जा रही है, जो कि मेगा बजट फिल्म है और अभी तक महज 7.5 मिलियन डॉलर की कमाई ही कर पाई है। कई स्थानीय पत्रिकाओं ने लिखा है कि यह लो बजट फिल्म घरेलू फिल्मों के लिए एक बड़ा रास्ता बनाने का काम करेगी और देश के सिनेमा को ऐसी अन्य फिल्मों की भी जरूरत होगी।