
Movie Review Ek Villain Returns: मनोरंजन के लिए 'हीरो' नहीं 'एक विलेन'
आर्यन शर्मा @ जयपुर. पिछले कुछ महीनों से हर नई हिन्दी फिल्म से उम्मीद जगती है कि इस बार तो सिनेमाई परदे पर अच्छा कंटेंट देखने को मिलेगा, लेकिन फिल्म रिलीज होते ही उम्मीदों का यह सूरज डूबते देर नहीं लगती। ज्यादातर फिल्मों में कमजोर राइटिंग और लचर एग्जीक्यूशन 'विलेन' बनते रहे हैं। सफल फिल्म 'एक विलेन' (2014) के सीक्वल 'एक विलेन रिटर्न्स' में भी ये पहलू बड़ी चूक साबित हुए हैं। फिल्म में रोमांस है, रोमांच है, एक्शन है और एकतरफा प्यार में टूटे दिल का बदला भी, पर सबकुछ 'मास्क' की ओट में यानी खामियों से छिप-सा गया है।
कहानी में एक के बाद एक कई लड़कियों की हत्या हो चुकी है। तफ्तीश में जुटी पुलिस का मानना है कि 'एक विलेन' लौट आया है। यह सीरियल किलर ऐसी लड़कियों को मौत के घाट उतार रहा है, जो उनको दिलोजान से प्यार करने वाले लड़के का हाथ छिटक कर दूसरे की बांहों को अपना घर बना लेती हैं। यह विलेन दिल टूटे आशिकों के लिए मसीहा बनना चाहता है। कहानी कभी वर्तमान तो कभी फ्लैशबैक में उछल-कूद करती रहती है।
कहानी में ताजगी की 'सुगंध' गायब है तो पटकथा खुद उलझन में है। कई सारे ट्विस्ट आते हैं, मगर उनको पिरोने का सलीका नहीं दिखता है। ट्रैक से भटका हुआ मोहित सूरी का निर्देशन एंगेज नहीं कर पाता। संगीत एवरेज है। गाने जुबां पर चढ़ने में नाकाम हैं। एडिटिंग लूज है, सीन सीक्वेंसिंग सही नहीं है। सिनेमैटोग्राफी ठीक-ठाक है।
लीड कास्ट में सभी चारों स्टाइलिश और गुड लुकिंग हैं, लेकिन एक्टिंग से कोई भरोसा नहीं देता है। शुरुआत से ही सकुचाते से दिखे जॉन अब्राहम ज्यादा रंग नहीं जमा पाए। अर्जुन कपूर की परफॉर्मेंस कामचलाऊ है। हॉट दिशा पाटनी एक्टिंग को 'दिशा' नहीं दे पाईं। तारा सुतारिया का 'सितारा' चमक नहीं बिखेरता है। जेडी चक्रवर्ती और शाद रंधावा के किरदार कमजोर लेखन का शिकार हो गए हैं। रोमांटिक-थ्रिलर के लिहाज से 'एक विलेन रिटर्न्स' में कई सारे ट्विस्ट और टर्न हैं, लेकिन मनोरंजन के लिहाज से फिल्म 'हीरो' नहीं 'एक विलेन' है।
Published on:
30 Jul 2022 01:05 am
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