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इस ‘जुरासिक वर्ल्ड’ की सैर करने में नहीं आता आनंद

फिल्म समीक्षा: जुरासिक वर्ल्ड डोमिनियनडायरेक्शन: कॉलिन ट्रेवोरस्टोरी: डेरेक कोनोली, कॉलिन ट्रेवोरस्क्रीनप्ले: एमिली कारमाइकल, कॉलिन ट्रेवोरस्टार कास्ट: क्रिस प्रैट, ब्राइस डलास हॉवर्ड, लॉरा डर्न, जेफ गोल्डब्लम, सैम नीलरन टाइम: 146 मिनट

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जयपुर

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Aryan Sharma

Jun 11, 2022

इस 'जुरासिक वर्ल्ड' की सैर करने में नहीं आता आनंद

इस 'जुरासिक वर्ल्ड' की सैर करने में नहीं आता आनंद

आर्यन शर्मा @ जयपुर. साल 1993 में प्रदर्शित स्टीवन स्पीलबर्ग निर्देशित साइ-फाइ फिल्म 'जुरासिक पार्क' को देख कर दर्शक हक्के-बक्के रह गए थे। इसमें डायनासोर्स को ऐसा दिखाया था मानो सचमुच में हों। तब दर्शकों के लिए यह कल्पना से परे अनुभव था। बॉक्स ऑफिस पर खूब धन वर्षा हुई और धीरे-धीरे यह लोकप्रिय फ्रेंचाइजी में शुमार हो गई। अब इस फ्रेंचाइजी की छठी और 'जुरासिक वर्ल्ड' ट्रिलॉजी की तीसरी फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड डोमिनियन' रिलीज हुई है। हालांकि डायनासोर्स की यह 'सल्तनत' उतनी जिज्ञासा नहीं जगाती है, जितनी इससे उम्मीद की जा रही थी। जुरासिक दौर के इस 'आखिरी किस्से' में विशालकाय डायनासोर्स का आपस में भिड़ना, इंसानों के पीछे दौड़ना जैसे सीन जरूर रोमांचित करते हैं।
कहानी में इस्ला नुब्लर के तबाह होने के बाद डायनासोर अब 'इंसानों की दुनिया' में रहने लगे हैं। कंपनी बायोसिन ने उन जेनेटिक्स की पहचान करने की प्रक्रिया को अपने हाथ में ले लिया है, जिससे मानव जाति की मदद की जा सकती है। हालांकि मैसी लॉकवुड के अपहरण से लेकर अन्य गलत कार्यों में बायोसिन इन्वॉल्व है। बायोसिन के नापाक इरादों से परदा तब हटता है, जब ओवेन ग्रैडी और क्लेयर, मैसी को बचाने के मिशन पर निकलते हैं।

दृश्य तमाशा के चक्कर में राइटिंग से ध्यान भटक गया
स्टोरी में फ्रेशनेस मिसिंग है। स्क्रीनप्ले क्रिस्प नहीं है। कॉलिन ट्रेवोर का निर्देशन ठीक-ठाक है। उन्होंने 'दृश्य तमाशा' बनाने की कोशिश की है। विजुअल इफेक्ट्स कमाल के हैं। कुछ दृश्य वाकई मंत्रमुग्ध कर देते हैं। फिल्म नॉस्टैल्जिक है, मगर ऊबड़-खाबड़ राइड के माफिक है। सिनेमैटोग्राफी बढ़िया है, पर कुछ अलग नहीं है। कलाकारों की अदाकारी अच्छी है। क्रिस प्रैट और ब्राइस डलास ने इस ट्रिलॉजी की पिछली मूवी के अपने किरदारों को आगे बढ़ाते हुए अच्छी परफॉर्मेंस दी है। 'जुरासिक पार्क' की तिकड़ी लॉरा डर्न, जेफ गोल्डब्लम और सैम नील की री-यूनियन जबरदस्त है। बाकी सपोर्टिंग कास्ट ने अपने रोल को शालीनता के साथ अदा किया है। बहरहाल, फिल्म में बहुत कुछ घिसा-पिटा है, लेकिन स्पेशल इफेक्ट्स इन कमियों को एक हद तक छुपा देते हैं। परदे पर डायनासोर भव्य हैं और अधिक विश्वसनीय हैं। लेकिन, इसके बावजूद फिल्म जॉय की अनुभूति नहीं कराती।

रेटिंग: **