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घनघोर इश्क में पागल प्रेमी और उसकी बर्बादी की कहानी ​है ‘कबीर सिंह’

संदीप रेड्डी वांगा निर्देशित तेलुगू फिल्म 'अर्जुन रेड्डी' (2017) को दर्शकों ने पसंद किया था। अब वह इसका हिन्दी रीमेक 'कबीर सिंह' लेकर आए हैं, लेकिन यह 'अर्जुन रेड्डी' की हिन्दी प्रतिलिपि से ज्यादा नहीं है।

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जयपुर

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Aryan Sharma

Jun 21, 2019

jaipur

घनघोर इश्क में पागल प्रेमी और उसकी बर्बादी की कहानी ​है 'कबीर सिंह'

राइटिंग, एडिटिंग एंड डायरेक्शन : संदीप रेड्डी वांगा
बेस्ड ऑन : तेलुगू फिल्म अर्जुन रेड्डी
म्यूजिक : मिथुन, अमाल मलिक, विशाल मिश्रा, सचेत-परंपरा, अखिल सचदेवा
सिनेमैटोग्राफी : सांथना कृष्णन रविचन्द्रन
एडिटिंग : आरिफ शेख
रनिंग टाइम : 174.30 मिनट
स्टार कास्ट : शाहिद कपूर, कियारा आडवाणी, सोहम मजूमदार, अर्जन बाजवा, सुरेश ओबेरॉय, निकिता दत्ता, कामिनी कौशल, आदिल हुसैन, अमित शर्मा, कुणाल ठाकुर

आर्यन शर्मा/जयपुर. कबीर सिंह... एक अलहदा किस्म की प्रेम कहानी, जिसमें नायक जिद्दी, गुस्सैल और आक्रामक है। जबकि नायिका मासूम, जिसके रहन-सहन और हाव-भाव से सादगी झलकती है। नायिका से नायक पागल प्रेमी की तरह इश्क करता है। यहां तक कि वह नायिका पर हमेशा अपना हक समझता है। तभी वह बार-बार कहता रहता है, 'मेरी बंदी है'। दोनों में प्यार और सेक्स भरपूर है। यही वजह है कि अपना प्यार नहीं मिलने पर नायक खुद को नशे में पूरी तरह डुबो लेता है। संदीप रेड्डी वांगा निर्देशित 'कबीर सिंह' उनकी ही तेलुगू फिल्म 'अर्जुन रेड्डी' का हिंदी रीमेक है। इश्क और बर्बादी की यह कहानी मजेदार तो है, पर मूवी की करीब तीन घंटे की अवधि मजा थोड़ा किरकिरा कर देती है। कहानी में कबीर सिंह (शाहिद कपूर) दिल्ली के मेडिकल कॉलेज का टॉपर स्टूडेंट है, पर उसका अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं है। सीनियर होने के कारण पूरे कॉलेज में उसकी धाक है। फर्स्ट ईयर की छात्रा प्रीति (कियारा आडवाणी) से उसे पहली नजर में ही प्यार हो जाता है। वह सभी स्टूडेंट्स में अनाउंस कर देता है कि प्रीति उसकी है और कोई भी उसकी ओर आंख उठाकर नहीं देखे। टॉपिक समझाने के बहाने वह प्रीति को अपना बना लेता है। इसके बाद इस लव स्टोरी कई उतार-चढ़ाव आते हैं।

फ्रेम दर फ्रेम कॉपी
कहानी इंटरेस्टिंग है। 'कबीर सिंह', 'अर्जुन रेड्डी' की फ्रेम दर फ्रेम कॉपी है। यहां तक कि संवाद भी 'अर्जुन रेड्डी' जैसे ही हैं। संदीप का डायरेक्शन ठीक है, लेकिन अगर वह फिल्म की लंबाई को कम करने पर भी ध्यान देते तो यह और मजेदार पेशकश बन सकती थी। दरअसल, एक समय पर ऐसा भी लगने लगता है कि फिल्म को अब खत्म हो जाना चाहिए। 'अर्जुन रेड्डी' में विजय देेवरकोंडा ने पूरी शिद्दत से टाइटल रोल प्ले किया था। 'कबीर सिंह' के इंटेंस रोल में शाहिद ने कैरेक्टर के गुस्से व आक्रामक मिजाज को पकड़ने की कोशिश की है। शराब और ड्रग्स का आदी होकर जिस तरह कबीर खुद को बर्बादी के कगार पर ले जाता है, उसमें भी जंचे हैं। फिर भी विजय की इंटेंसिटी को मैच नहीं कर पाए। कियारा खूबसूरत व मासूम लगी हैं, लेकिन 'अर्जुन...' की शालिनी जैसा जादू नहीं चला पातीं। कबीर के दोस्त शिवा के रोल में सोहम मजूमदार का काम शानदार है। अर्जन बाजवा, निकिता दत्ता, कामिनी कौशल, सुरेश ओबेरॉय समेत अन्य सपोर्टिंग कास्ट की परफॉर्मेंस ठीक-ठाक है। गीत-संगीत मेलोडियस है। 'बेखयाली में...' सरीखे गाने दिल में गहराई तक उतर जाते हैं। कैमरा वर्क आकर्षक है, पर संपादन कमजोर है। फिल्म को करीब 45 मिनट कम किया जा सकता था।

क्यों देखें : 'कबीर सिंह' में इश्क का पागलपन है, जिसके ट्रीटमेंट का अंदाज निराला है। फिल्म में एक्टिंग और म्यूजिक अच्छा है, लेकिन खामियां भी बहुत हैं। बहरहाल, अगर आप जरा हटके प्रेम कहानी पसंद करते हैं और आपने 'अर्जुन रेड्डी' नहीं देखी है तो 'कबीर सिंह' को देखा जा सकता है।

रेटिंग : 2.5 स्टार