16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ग्रेटर नगर निगम प्रशासन की नीतियों के विरोध में उतरी वित्त समिति

नगर निगम ग्रेटर में भी अंदरूनी खींचतान कम होने का नाम नहीं ले रही है। नियमों को दरकिनार कर 2 करोड़ रुपए से ज्यादा के टेंडरों में अनुमति नहीं लेने का वित्त समिति ने विरोध किया है।

less than 1 minute read
Google source verification

जयपुर

image

Umesh Sharma

Feb 08, 2023

ग्रेटर नगर निगम प्रशासन की नीतियों के विरोध में उतरी वित्त समिति

ग्रेटर नगर निगम प्रशासन की नीतियों के विरोध में उतरी वित्त समिति

जयपुर। नगर निगम ग्रेटर में भी अंदरूनी खींचतान कम होने का नाम नहीं ले रही है। नियमों को दरकिनार कर 2 करोड़ रुपए से ज्यादा के टेंडरों में अनुमति नहीं लेने का वित्त समिति ने विरोध किया है।दरअसल नगर निगम के बजट को पास करने के लिए पिछले दिनों नगर निगम ग्रेटर की वित्त समिति की बैठक हुई थी। बैठक में बजट तो पास कर दिया गया, लेकिन अन्य मुद्दों पर समिति सदस्य बिफर गए। नियम है कि 2 करोड़ रुपए से ज्यादा का टेंडर है तो वित्त समिति की अनुमति ली जाती है। मगर समिति को दरकिनार कर टेंडर किए जा रहे हैं। यही नहीं उद्यान से संबंधित टेंडरों में तो काम भी पूरा नहीं हुआ तो निगम लगातार भुगतान किया जा रहा है। इसे लेकर समिति चेयरमैन और पूर्व महापौर शील धाभाई ने आयुक्त को नोटशीट भी भेजी है।

इसलिए उपजा विवाद

नगर निगम ने पिछले दिनों सांगानेर, जगतपुरा, विद्याधर नगर, झोटवाड़ा और मानसरोवर में डोर टू डोर कचरा संग्रहण के टेंडर किए थे। इसमें दस गुणा तक ज्यादा दरें आई हैं। अभी तक निगम ने वर्कआॅर्डर नहीं दिया है। मगर वित्त समिति को आपत्ति है कि आखिर उनसे इन टेंडरों को लेकर अनुमति क्यों नहीं ली गई। इसी तर समिति सदस्यों ने यह भी आपत्ति जताई है कि जब यह तय हुआ था कि एक ही कंपनी को सभी जोन में काम नहीं दिया जाएगा तो फिर वापस नियमों में बदलाव क्यों किया गया।
—————————————————————————————————————
नगर निगम में वित्त समिति को दरकिनार किया जा रहा है। किसी भी बड़े टेंडर में वित्त समिति की मंजूरी नहीं ली जा रही है। इसे लेकर समिति सदस्यों ने नाराजगी जताई है। मैंने आयुक्त तक आपत्ति पहुंचा दी है।

शील धाभाई, चेयरमैन, वित्त समिति