15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Fire In Sariska: गर्मी के कहर से मंडराया बड़ा खतरा

Sariska fire: बढ़ती गर्मी से जंगल और धधक सकते हैं। सवाल यह कि ऐसी घटनाएं गर्मी के दिनों में आखिर बढ़ क्यों जाती हैं?

2 min read
Google source verification
Fire In Sariska: गर्मी के कहर से मंडराया बड़ा खतरा

Fire In Sariska: गर्मी के कहर से मंडराया बड़ा खतरा

Sariska fire: सरिस्का बाघ परियोजना में तापमान बढ़ने के साथ ही आग लगने का सिलसिला जारी है।एक सप्ताह में चौथी बार आग लग गई ... अप्रैल के शुरुआत से ही गर्मी का कहर जारी है। विशेषज्ञों का कहना है बढ़ती गर्मी से जंगल और धधक सकते हैं। फिर चाहे वह राजस्थान हो या मध्यप्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड... गौरतलब है राजस्थान में 3 जिलों में पारा 43 डिग्री को पार कर गया ...जयपुर समेत 18 जिलों में लू का येलो अलर्ट जारी किया गया है ...दरअसल रिकॉर्डतोड़ गर्मी के कारण जंगलों में आग लगने का खतरा मंडराने लगा है। भारतीय वन सर्वेक्षण के अनुसार 28 मार्च से 30 मार्च के बीच में देश के जंगलों में 16 हजार 840 आगजनी की घटनाएं दर्ज की गई ।


सवाल यह कि ऐसी घटनाएं गर्मी के दिनों में आखिर बढ़ क्यों जाती हैं? गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और ओडिशा के जंगलों में इस बार गर्मी में आग लगने की सबसे अधिक संभावना है। अधिकतम तापमान सामान्य से इन राज्यों में 4-6 डिग्री सेल्सियस अधिक रहता है। इस कारण आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं।


इस बारे में एक रिपोर्ट जर्मन वेबसाइट DW में छपी...इसके अनुसार वैज्ञानिक बताते हैं कि इंसानों की वजह से जंगल में आग लगने की 95 फीसदी घटनाएं शुरू होती हैं .. तापमान में लगातार बढ़ोतरी पिछले 35 सालों से ग्लोबल वार्मिंग के चलते हो रही है जिसके लिए हम ही रेस्पोंसिबल हैं...बढ़ती गर्मी ने ही जंगलों में आगजनी की घटनाओं को बढ़ाया है...एक्सपर्ट यही मानते है...आपको जानकार हैरानी होगी कि कोयले, तेल और गैस के जलने से हो रहे जलवायु परिवर्तन की वजह से जंगलों में आग का जोखिम 34 से 60 फीसदी तक बढ़ गया है...

डाउन टू अर्थ की संपादक सुनीता नारायण कहती हैं देश में वन-क्षेत्र के रूप में रिकॉर्डेड (अभिलिखत) भूमि और उस पर मौजूद वास्तविक वन-क्षेत्र के बीच अंतर है। रिकॉर्डेड यानी अभिलिखित वन क्षेत्र, उस वन क्षेत्र को कहा जाता है, जो राज्य सरकार के वन विभाग के अधीन आता है। डाउन टू अर्थ ने अपने एक विश्लेषण में पाया है कि इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट-2021 (आईएसएफआर 2021) में देश के वन-क्षेत्र को लेकर उसके आकलन और हकीकत में बड़ा फर्क है। इस विश्लेषण के मुताबिक, देश के वनों का लगभग 26 मिलियन यानी 2.60 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र गायब है।

चिंता की बात तो यह है कि कई राज्यों के जंगल में आग लगने से वन्य संपदा और वन्य जीवों के जीवन पर खतरा मंडराने लगा है... जंगलों को राख होने से रोका जाना चाहिए..अगर ऐसा नहीं किया गया तो इसके दुष्प्रभाव हमें ही झेलने पड़ेंगे...