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मकरा विलक्कू महोत्सव: भगवान अयप्पा के मंदिरों में दक्षिण भारत की संस्कृति हुई साकार

मंदिरों में सजी दीपमालाएं, शाम को आरती के बाद भजनों की प्रस्तुतियां

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जयपुर

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Abdul Bari

Jan 15, 2026

जयपुर. केरल की सबरीमला मंदिर की तर्ज पर राजधानी के अयप्पा मंदिरों में मकर संक्रांति के मौके पर बुधवार को दक्षिण भारत की संस्कृति मकरा विलक्कू महोत्सव के तहत साकार हो उठी। सुबह पल्लिउणरत्त के बाद अष्टाद्रव्य गणपति होमम हुआ। भगवान की जल, दूध,घी, शहद, नारियल पानी से अभिषेक हुआ। शाम को आरती के बाद भजनों की प्रस्तुतियां दी। मंदिर को 1008 दीपकों और दीपस्तंभम से सजाया।

—खातीपुरा स्थित मंदिर में दो दिवसीय मकरा विलक्कू महोत्सव समापन अष्ट द्रव्य महागणपति हवन साथ हुआ। दिनभर भगवान के विभिन्न द्रव्यों से अभिषेक हुए। स्वामी शरणम् अय्यप्पा शरणम् के मंत्र की आवाज के साथ मंदिर परिसर गूंज उठी। शाम को फूलों की रंगोली के पुष्पालंकार एवं चुट्टु विलक्कु के साथ महाआरती हुई। 1008 दीपों से मंदिर के चारों ओर चुट्टविलक्कू जलाया। 108 दीपों की दीपास्थम्भम जलाया। शाम की महादीप अराधना के बाद अय्यप्पा भजना समिति के कलाकारों ने भरतनाट्यम, मोहिनियाट्टमं और कथक की प्रस्तुति दी।

—गोपालपुरा स्थित मंदिर में तीन दिवसीय 41वीं प्राण प्रतिष्ठा समारोह और मकरा विलक्कू महोत्सव के तहत हरिनाम कीर्तन, अष्ट द्रव्य महागणपति हवन, आष्टाभिषेकम़ और भगवान अय्यप्पा के विभिन्न पदार्थों से अभिषेक किया गया। आरती के बाद भक्तों को अन्नकूट प्रसादी वितरण किया।

—खातीपुरा स्थित मंदिर में सबरीमला की तर्ज पर विशेष पूजा अर्चना का आयोजन धार्मिक विधि-विधान के अनुसार हुआ। संजय कृष्णन ने बताया कि हर साल की तरह इस साल भी सैकड़ों दक्षिण भारतीय विशेष रूप से जयपुर में रह रहे केरलवासियों ने व्रत रखकर भक्ति की।

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