13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बालोतरा के बिठूजा औद्योगिक क्षेत्र में लगेगा देश का पहला कास्टिक रिकवरी संयंत्र

वस्त्र उद्योग को संरक्षण एवं बढ़ावा देने की कवायदराज्य प्रदूषण मंडल के मुख्यालय में हुआ अनुबंध

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Savita Vyas

Oct 14, 2020

बालोतरा के बिठूजा औद्योगिक क्षेत्र में लगेगा देश का पहला कास्टिक रिकवरी संयंत्र

बालोतरा के बिठूजा औद्योगिक क्षेत्र में लगेगा देश का पहला कास्टिक रिकवरी संयंत्र

जयपुर। वस्त्र उद्योग को संरक्षण एवं बढ़ावा देने के उद्देश्य से देश का पहला कास्टिक रिकवरी प्लांट बालोतरा के बिठूजा औद्योगिक क्षेत्र में बनने जा रहा है। इसके निर्माण के लिए राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल और बालोतरा वाटर पॉल्यूशन कंट्रोल ट्रीटमेंट एंड रिसर्च फ ाउंडेशन ट्रस्ट के बीच सीईटीपी में 500 केएलडी क्षमता के संयुक्त कास्टिक रिकवरी संयंत्र के निर्माण को लेकर अनुबंध किया गया। आगामी कुछ महीनों में संयंत्र का काम पूरा हो जाएगा।

7.20 करोड़ रुपए की लागत

मंडल अध्यक्ष पीके गोयल ने बताया कि लगभग 7.20 करोड़ रुपए की लागत से संयंत्र विकसित होगा। संभवतया यह देश का पहला संयंत्र होगा। मंडल के सदस्य सचिव उदय शंकर ने बताया कि संयुक्त कास्टिक रिकवरी संयंत्र परियोजना में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से लागत का 80 प्रतिशत आर्थिक अनुदान दिया जाएगा। वहीं सीईटीपी ट्रस्ट की ओर से लागत का 20 प्रतिशत वहन किया जाएगा।

उद्योगों के विकास को मिलेगा बढ़ावा
पर्यावरण विभाग की ओर से वर्ष 2017-18 के बजट में बाड़मेर जिले के बिठूजा क्षेत्र में स्थित धपाई की औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट से कास्टिक की रिकवरी के लिए पायलट स्तर पर संयंत्र की स्थापना किए जाने की घोषणा की गई थी। इस प्रकार का संयुक्त रूप से कॉमन कास्टिक रिकवरी संयंत्र की यह परियोजना पायलट स्तर पर पूरे भारत में प्रथम परियोजना है। इससे उद्योगों के विकास को बढ़ावा मिलेगा। आस-पास के बिठुजा क्षेत्र में स्थित औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट से कास्टिक की रिकवरी की जा सकेगी।

यह होगा फायदा

कास्टिक रिकवरी प्लांट लगने से इकाइयों से आने वाले रासायनिक पानी को ट्रीट करने से पहले ही प्लांट से कास्टिक को अलग कर दिया जाएगा। कास्टिक को उद्यमी पुन: उपयोग में ले सकेंगे। इकाइयों में बार-बार कास्टिक को उपचारित कर उपयोग में लेने से लागत भी कम होगी। इसके अलावा ईटीपी प्लांट में एल्केलाइन में पानी की कमी होगी और ईटीपी का अच्छा संचालन हो सकेगा। बालोतरा, जसोल, बिठुजा में 400 से अधिक वस्त्र उद्योग के रंगाई, छपाई और धुलाई के कारखाने हैं। यहां हमेशा उद्यमी कारखानों के रसायनिक पानी को लूनी नदी व खुले में छोड़ रहे हैं। लिहाजा प्रदूषण की समस्या गहराती जा रही है। इसका खामियाजा बिठूजा के साथ ही आस-पास के लोगों को झेलना पड़ रहा है।