
जयपुर. राजधानी में चार विदेशी दलाल निजी हॉस्पिटलों में अंग प्रत्यारोपण के लिए डोनर लेकर आते थे। आरोपियों ने एक रैकेट चला रखा था। जैसे ही मरीज का पता चलता तो वे अपने-अपने देश में गरीब लोगों को चिह्नित करना शुरू कर देते। पैसों का लालच देकर उन्हें अंग बेचने के लिए जयपुर लाया जाता था। आरोपियों की मदद करने के लिए भारत में भी एक दर्जन दलाल सक्रिय थे। मरीज से गिरोह हॉस्पिटल का खर्चा, डोनर को देने के लिए रकम, ऑपरेशन के बाद डोनर के स्वस्थ होने तक जयपुर सहित भारत के अन्य शहरों में रहने का खर्चा और खुद की दलाली की रकम वसूलता था। गिरोह एक मरीज से 18 से 25 लाख रुपए लेता था, जिसमें 4 से 6 लाख रुपए डोनर को और 3 से 5 लाख रुपए हॉस्पिटल प्रशासन को दिए जाते थे। इसके अलावा अन्य खर्चों के बाद बची रकम को आपस में बांट लेते थे।
एसीबी सूत्रों के मुताबिक एसएमएस अस्पताल के गिरफ्तार सहायक प्रशासनिक अधिकारी गौरव सिंह, फोर्टिस हॉस्पिटल के समन्वयक विनोद व ईएचसीसी हॉस्पिटल के समन्वयक अनिल जोशी से पूछताछ के बाद विदेशी दलालों की पहचान हुई है। कम्बोडिया निवासी दलाल संची, बांग्लादेश निवासी दलाल सुलेमान व राजवी और नेपाल निवासी दलाल मोहन नेपाली की तलाश की जा रही है। सभी दलाल जयपुर भी कई बार डोनर को लेकर आ चुके हैं। समन्वयक विनोद व अनिल का काम भी दलाली का ही था। जबकि बांग्लादेशी दलालों की मदद झारखंड निवासी मुर्तजा करता था। गुरुग्राम पुलिस की कार्रवाई होने से कुछ घंटे पहले ही मुर्तजा भाग गया था।
Published on:
10 Apr 2024 12:29 pm
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