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skill development: दिव्यांग लोगों के संघ का गठन करना वर्तमान दौर की जरूरत

कौशल विकास ( skill development ) पर सरकार का फोकस और इस दिशा में पर्याप्त ध्यान देने से निश्चित रूप से बदलाव नजर आने लगा है और लोगों को सशक्त ( empowering ) बनाने, कुशल ( skilling ) बनाने और लोगों को एक स्थायी आजीविका ( livelihood ) देने के परिणाम भी सामने आने लगे हैं।

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skill development: दिव्यांग लोगों के संघ का गठन करना वर्तमान दौर की जरूरत

skill development: दिव्यांग लोगों के संघ का गठन करना वर्तमान दौर की जरूरत

कौशल विकास पर सरकार का फोकस और इस दिशा में पर्याप्त ध्यान देने से निश्चित रूप से बदलाव नजर आने लगा है और लोगों को सशक्त बनाने, कुशल बनाने और लोगों को एक स्थायी आजीविका देने के परिणाम भी सामने आने लगे हैं। समाज के वंचित वर्ग के लोगों ( disabled people ) के बीच समानता लाने और गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य हासिल करने का काम दरअसल, अधिक रोजगार पैदा करने से पूरा नहीं होगा, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर करने, उन्हें सशक्तबनाने और उनके पास पहले से मौजूद कौशल का सम्मान करके उन्हें स्वतंत्र बनाने से हम यह लक्ष्य आसानी से हासिल कर सकेंगे। लोगों, उद्यमियों, सरकार और बड़े उद्यमों को ऐसे स्वयं सहायता समूह बनाने के लिए जाना जाता है, जिन्हें फाइनेंस सुविधा उपलब्ध है और जो उन्हें रोजगार प्रदान करते हैं, हालांकि दिव्यांग लोगों के भी छोटे-छोटे संघ बनें, इस दिशा में बहुत अधिक प्रयास नहीं हुए हैं।
संगठनों द्वारा जुटाई गई फंडिंग अभिन्न अंग
नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि लगभग कुछ साल पहले स्थिति यह थी कि संगठनों द्वारा जुटाई गई फंडिंग और दिव्यांग लोगों के अधिकारों को मुख्यधारा का अभिन्न अंग माना जाता था और ऐसा समझा जाता था कि समाज में समानता लाने के लिए इनका उपयोग किया जा सकता है। कई छोटे उद्यमों ने दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने के लिहाज से उन्हें प्रशिक्षण देने और कौशल से सुसज्जित करने के अनेक मॉडल पेश किए। ये ऐसे मॉडल थे, जिनकी सहायता से दिव्यांग लोगों को रोजगार के काबिल बनाने में सहायता मिलती थी। ऐसा ही एक उदाहरण है यूथ4जॉब्स। यह एक ऐसा संगठन है जो ग्रामीण क्षेत्रों के दिव्यांग युवाओं को कौशल आधारित प्रशिक्षण प्रदान करता है। लेकिन एक विशाल असंगठित कुशल कार्यबल अभी भी देश में मौजूद है, उन्हें समूहों के छोटे संघ बनाने के लिए संगठित किया जाना चाहिए, जो आसानी से स्वयं सहायता समूहों के रूप में खुद को एक कर सकें और न केवल देश के भीतर बल्कि विदेशों से भी संगठनों से वित्तीय सहायता हासिल कर सकें। हस्तशिल्प और हस्तनिर्मित उत्पादों के साथ-साथ लिबरल साइंस में भी कौशल आधारित प्रशिक्षण के लिए भी अब दिव्यांग लोगों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
खेती को अपने व्यवसाय के रूप में अपनाना
कृषि और कृषि आधारित व्यवसाय आज बहुत फल-फूल रहे हैं और अधिक से अधिक लोग इन्हें अपना रहे हैं। कई राज्यों के पास बड़ी कृषि भूमि होने के कारण, खेती की आधुनिक और नवीन अवधारणाओं को सीखने के लिए दिव्यांग लोगों को कुशल बनाने का एक मॉडल अपनाया जा सकता है। इससे न केवल उन लोगों को मदद मिलेगी, जिनके पास पहले से ही कृषि भूमि है, बल्कि उन लोगों को भी जो खेती को अपने व्यवसाय के रूप में अपनाना चाहते हैं। संगठन इन व्यक्तियों की कटाई में मदद करने के लिए हाथ मिला सकते हैं, अभी ज्यादातर विदेशों में इस मॉडल को स्वीकार किया जाता है। अगर ऐसा संभव हुआ, तो दिव्यांगों को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकेगी।
उद्योग में छिपी संभावनाओं का पता लगाने का अवसर
सोशल मीडिया और मनोरंजन उद्योग बहुत बड़ा है और इनका कैनवस भी बहुत व्यापक है। दिव्यांग व्यक्तियों को इस व्यवसाय में शामिल होने के लिए प्रशिक्षण और कौशल प्रदान करके इस उद्योग में छिपी संभावनाओं का पता लगाने का अवसर दिया जा सकता है। शार्क टैंक इंडिया जैसे शो में भी एक ऐसा सीजन होना चाहिए, जो सिर्फ दिव्यांग लोगों के लिए हो, जिसमें वे अपने अभिनव विचारों का प्रदर्शन कर सकें और वित्त सुविधा हासिल कर सकें। यह मंच सामाजिक समावेश के उद्देश्य को भी पूरा कर सकता है। निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि संगठित तौर पर काम करने वाले छोटे संघ अपने व्यवसायों के लिए धन जुटा सकते हैं और लोगों को, विशेष रूप से दिव्यांग व्यक्तियों को अपने व्यवसाय को कायम रखने में मदद कर सकते हैं।