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जयपुर जिंदा बम मामला: सुनवाई से एक न्यायाधीश ने खुद को किया बाहर

राजधानी जयपुर में साल 2008 में सिलसिलेवार 8 बम धमाके हुए थे, वहीं एक जिंदा बम मिला था। अब इस मामले में सुनवाई से एक जज ने खुद को अलग कर लिया। इस मामले की अब दूसरी बेंच सुनवाई करेगी।

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जयपुर

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Kamal Mishra

Feb 07, 2026

Jaipur live bomb case

जयपुर जिंदा बम मामला (फोटो-पत्रिका)

जयपुर। हाईकोर्ट में शुक्रवार को न्यायाधीश समीर जैन ने जयपुर में जिंदा बम मिलने के 17 साल पुराने मामले में अपील पर सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया। जयपुर बम धमाका प्रकरण में पुलिस जांच में कमजोरी के आधार पर सभी आरोपी बरी करने का फैसला देने वाली बेंच में शामिल रहने के कारण वे सुनवाई से हट गए।

न्यायाधीश महेन्द्र कुमार गोयल व न्यायाधीश समीर जैन की खंडपीठ ने शुक्रवार को शाहबाज अहमद व मोहम्मद सरवर की अपील पर सुनवाई की। बम विस्फोट मामलों की जयपुर स्थित विशेष अदालत ने जयपुर में मई 2008 में जिंदा बम मिलने के मामले में इन दोनों के साथ ही सैफुर्रहमान व मोहम्मद सैफ को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे अपील में चुनौती दी गई।

सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित

उधर, मई 2008 में 8 बम धमाके होने के मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने विशेष अदालत के सजा के आदेश को रद्द कर सभी आरोपियों को बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील लंबित है।

क्या है जिंदा बम का पूरा मामला?

दरअसल, 13 मई 2008 को जयपुर के कई स्थानों पर सिलसिलेवार 8 बम धमाके हुए थे। इन बम धमाकों में 70 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी, वहीं 180 से अधिक लोग घायल हुए थे। इसी बीच पुलिस जांच के दौरान चांदपोल बाजार स्थित एक गेस्ट हाउस के पास से नवां जिंदा बम मिला था, जिसको धमाका होने से 15 मिनट पहले डिफ्यूज कर लिया गया था। नवां धमाका नहीं होने से कई लोगों की जान बच गई थी।

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