15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कम लागत में तैयार होगा जेरेनियम का पौधा

सीमैप के वैज्ञानिकों ने विकसित की नई तकनीक कीमती तेल बनाने में आता है काम

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Suresh Yadav

Feb 28, 2020

कम लागत में तैयार होगा जेरेनियम का पौधा

कम लागत में तैयार होगा जेरेनियम का पौधा

जयपुर। किसानों की आमदनी बढ़ाने तथा उनकी फसलों की लागत को कम कररने के लिए सरकार के स्तर पर लगातार प्रयास हो रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक भी इस दिशा में लगातार रिसर्च कर रहे हैं। सुगंधित पौधों की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी एक प्रमुख जरिया बन सकती है। जेरेनियम भी एक ऐसा ही सुगंधित पौधा है जिसका तेल बेहद कीमती होता है। लखनऊ स्थित सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) के वैज्ञानिकों ने पॉलीहाउस की सुरक्षात्मक शेड तकनीक विकसित की है, जिससे जेरेनियम उगाने की लागत कम हो गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार जेरेनियम की पौधे से पौध तैयार की जाती है। किसानों के सामने यह समस्या थी कि बारिश के समय में यह पौध खराब हो जाती थी। इसी कारण से किसानों को पौध सामग्री भी काफी महंगी पड़ती थी। सीमैप के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि जेरेनियमम की नई तकनीक से की जाने वाली खेती से इसकी लागत 35 रुपए के स्थान पर सिर्फ दो रुपए रह जाएगी।
सीमैप के वैज्ञानिक डॉ. सौदान सिंह का कहना है कि जेरेनियम की पौध को अब तक वातानिकुलित ग्लास हाउस में संरक्षित किया जाता था, लेकिन अब पॉलीहाउस की सुरक्षात्मक शेड तकनीक विकसित हो जाने से किसान के खेत पर ही काफी सस्ती लागत में इसे तैयार किया जा सकता है। एक एकड़ खेती के लिए करीब चार हजार पौधों की जरूरत पड़ती है। इसके लिए 50-60 वर्ग मीटर का पॉलीहाउस बनाना होता है, जिसमें करीब 8-10 हजार रुपये का खर्च आता है। इसकी खेती का सबसे उपयुक्त समय नवंबर महीने को माना जाता है। डॉ. सिंह ने बताया कि इसकी खेती अरोमा मिशन के तहत की जा रही है। सीमैप अरोमा मिशन के तहत जेरेनियम की खेती को बढ़ावा देने के लिए मदर प्लांट उपलब्ध करा रहा है। इस पहल का उद्देश्य जेरेनियम की खेती को व्‍यावसायिक रूप से बढ़ावा देना है ताकि किसानों की आय में बढ़ोतरी हो सके। फिलहाल इसे उत्तर प्रदेश के लखनऊ, सीतापुर, कानपुर, बाराबंकी, बदायूं, अलीगढ़, गाजियाबाद, रामपुर, बरेली, रायबरेली, फतेहपुर, अंबेडकर नगर, उन्नाव, गोरखपुर, हरदोई, एटा, हाथरस, संभल, मथुरा, बांदा, बुलंदशहर, कन्नौज, जालौन, अमेठी, कासगंज एवं बिजनौर में प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
सीमैप के कार्यकारी निदेशक डॉ. अब्दुल समद का कहना है कि जेरेनियम मूल रूप से दक्षिण अफ्रीका का पौधा है। इसकी खेती मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार, हिमाचल प्रदेश और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में होती है। जेरेनियम के पौधे से प्राप्त तेल काफी कीमती होता है। भारत में इसकी औसत कीमत करीब 12 से 18 हजार रुपये प्रति लीटर है। मात्र चार माह की फसल में लगभग 80 हजार रुपये की लागत आती है और इससे करीब 1.50 लाख रुपये तक फरायदा हो सकता है।