
ग्लेशियर पिघलने से हिमालय की झीलों में बाढ़ का खतरा
बर्लिन . जलवायु परिवर्तन के कारण के चलते हो रही तापमान में बढ़ोतरी सेे ग्लेशियरों के अस्तित्व पर भयावह संकट मंडरा रहा है, नतीजन वे पिघल रहे हैं। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि ग्लोबल वार्मिंग के परिणामस्वरूप हिमालय की हजारों झीलें भारी बाढ़ का कारण बन सकती हैं।
झीलों पर यह अध्ययन जर्मनी की पॉट्सडैम विश्वविद्यालय के तीन शोधकर्ताओं ने किया। उनका मानना है कि एशियाई पर्वत शृंखला में लगभग 5000 झीलें अस्थिर हो चुकी हैं, जिसके कारण ग्लेशियर झील में बाढ़ का प्रकोप हो सकता है। पहाड़ के निचले हिस्से में रहने वाले लोगों के लिए यह विनाशकारी हो सकता है। शोधकर्ताओं ने झील के मॉडल के आधार पर 5.4 अरब सिमुलेशन चलाए थे, जो स्थलाकृतिक और उपग्रह डेटा का उपयोग करके बनाए गए थे। उनका कहना है कि बर्फ पिघल रही है और धीरे-धीरे ढीली चट्टान और गंदगी के इन अवरोधों को तोड़ रही है। खतरनाक बात यह है कि उनके पिघलने की रफ्तार दिनों दिन तेज होती जा रही है।
हेलीकॉप्टरों की अंधाधुंध उड़ानें उच्च हिमालयी क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं। 2012 में जीबी पंत पर्यावरण संस्थान श्रीनगर गढ़वाल के शोध में भी यह बात सामने आ चुकी है कि केदारनाथ के लिए संचालित की जा रही हवाई सेवाओं से वहां पाए जाने वाले दुर्लभ जीव जंतुओं के व्यवहार में परिवर्तन आया है। यह साफ हो चुका है कि केदारनाथ की हवाई सेवाओं से यहां पाए जाने वाले जीव जंतुओं के व्यवहार में परिवर्तन आया है। इनकी प्रजनन क्षमता पर भी असर पड़ा है। हेलिकॉप्टर की उड़ान की ऊंचाई निर्धारित नहीं होने से केदारघाटी के गांवों में पालतू पशुओं के आचरण पर भी प्रभाव देखा गया है। हिमालय के पूर्वी हिस्सों में ग्लेशियर झील के प्रकोप से बाढ़ का खतरा तीन गुना अधिक है। अगले दशक में हिमालयी ग्लेशियरों के दो-तिहाई भाग गायब होने जा रहे हैं। यह दर्शाता है कि झीलों में बहुत सारा पानी गंभीर खतरा पैदा करने वाला है।
Published on:
05 Jan 2020 12:46 am
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