
देवेंद्र सिंह राठौड़/जयपुर. Tiger Safari: राजधानी के जंगल में इस साल के अंत तक बाघों की दहाड़ गूंजेगी। खासबात है कि सैलानियों को बाघों का दीदार करने के लिए जयपुर से रणथम्भौर-सरिस्का नहीं जाना पड़ेगा। उन्हें लेपर्ड, हाथी, लॉयन सफारी के बाद अब टाइगर सफारी की सौगात भी यहीं उपलब्ध होगी। दरअसल, नाहरगढ़ जैविक उद्यान में टाइगर सफारी प्रस्तावित है। इसका निमार्ण कार्य चल रहा है। इसे 30 वर्ग किमी हैक्टेयर में बनाया जा रहा है। इसपर करीब 4.50 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इससे मार्च तक ही बनाकर शुरू करने का लक्ष्य था, लेकिन टेंडर प्रक्रिया में देरी होने की वजह से सैलानियों का इंतजार और बढ़ गया। वन अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में 70 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इस साल के अंत तक हर संभव टाइगर सफारी शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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टाइगर सफारी में सैलानी बाघ बाघिन का दीदार कर सके इसके लिए बाघ बाघिन का जोड़ा दूसरे राज्यों से लाना पड़ेगा। इसके लिए महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्यप्रदेश से लाने के प्रयास किए गए थे, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है।
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इसलिए उपयोगी साबित होगी: जयपुर में सैलानी यहां की विरासत के साथ ही आमेर में हाथी की सफारी, लेपर्ड सफारी व लॉयन सफारी करते हैं, लेकिन बाघों के दीदार के लिए उन्हें यहां से अन्यंत्र जाना पडता है। टाइगर सफारी बनने से सैलानियों का समय और खर्चे की बचत होगी।
वन अधिकारियों के अनुसार टाइगर सफारी के जंगल में आठ शेप के ट्रैक बनाया जा रहा है। ये करीब आठ किलोमीटर लंबा होगा। साथ ही एक भव्य प्रवेश द्वार, एक वॉच टावर, दस शेल्टर, पानी की तलाई आदि भी विकसित किए जा रहे हैं।
Published on:
08 Sept 2023 12:32 pm
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