कॉरीडोर में रखी हुई टेबल और उन पर मूक पशुओं का हो रहा है इलाज और पशु चिकित्सक विश्राम ग्रह में बैठ कर काट रहे हैं पर्ची। लार्ज एनिमल को ऑपरेट करने के लिए जगह ही नहीं। मूक पशुओं को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने के दावे राज्य के सबसे बड़े पशुचिकित्सालय पांचबत्ती स्थित पॉलीक्लीनिक में टूटते नजर आए।
जहां एक ओर पॉलीक्लिीनिक से अधिग्रहण कर चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग को दी गई भूमि पर नए सेटेलाइट अस्पताल की आधारशिला रखी जा रही है वहीं मूक पशुओं की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
सेटेलाइट अस्पताल के लिए भूमि एक्वायर
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट में सेटेलाइट अस्पताल बनाए जाने की घोषणा की थी जिसकी पालना में पॉलीक्लीनिक की तकरीबन ४ हजार वर्ग मीटर भूमि सेटेलाइट अस्पताल के लिए चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग को सौंपी गई थी । भूमि अधिग्रहण से पॉलीक्लीनिक के ऑपरेशन थियेटर, ओपीडी और एक्सरे रूम को तोड़ दिया गया। जगह नहीं रही तो पशु चिकित्सकों ने कॉरीडोर में ही टेबल लगाकर पशुओं का इलाज करना और विश्राम गृह में बैठ कर पर्ची काटना शुरू कर दिया। ओपीडी और ऑपरेशन थियेटर का सामान एक कमरे में स्टोर कर दिया। कर रहे केवल इमरजेंसी ऑपरेशन
पॉलीक्लीनिक में जयपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से पशुपालक अपने पशुओं को इलाज करवाने आते हैं लेकिन जगह नहीं होने से केवल इमरजेंसी वाले ऑपरेशन ही हो रहे हैं वह भी खुले में।
गिर चुका है छज्जा
कुछ दिनों पहले ओटी कक्ष के बाहर का छज्जा भी टूट गया था, गनीमत यह रही कि उस दौरान वहां कोई नहीं था। पूरे भवन की छत जगह जगह से टूटी हुई है जो कहीं भी गिर सकती है। वहीं परिसर में जगह जगह कचरे का ढेर परिसर की दुर्दशा की कहानी कह रहे हैं।
10 करोड़ मिले तो सुधरे दशा
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट में पॉलीक्लीनिक के लिए 10 करोड़ रुपए दिए जाने की घोषणा की थी जो अभी तक पॉलीक्लीनिक को अभी नहीं मिल सके हैं। पॉलीक्लीनिक प्रशासन इस राशि के इंतजार में हैं जिससे यहां की दशा में सुधार किया जा सके।
इनका कहना है,
पॉलीक्लीनिक का कुछ हिस्सा सेटेलाइट अस्पताल को दिया गया है जिसके चलते कुछ हिस्सा तोड़ दिया गया है। जैसे ही नई व्यवस्था होगी पॉलीक्लीनिक को व्यवस्थित किया जाएगा। फिलहाल लार्ज एनिमल की ओटी और ओपीडी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
डॉ. जितेंद्र राजोरिया, उपनिदेशक,पॉलीक्लीनिक, पंाचबत्ती।