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Real estate: स्टाम्प ड्यूटी की दर को तर्कसंगत बनाए सरकार

बैंक लोन ( bank loans ) पर स्टाम्प शुल्क ( stamp duty ) पर बजट भाषण एंव अधिसूचना में अंतर तथा वर्तमान दरों को तर्कसंगत एवं सरल बनाने की व्यापार व उद्योग जगत ने मांग की। रियल एस्टेट कारोबारियों ( Real estate traders ) का कहना है कि वर्तमान दौर में विकासकर्ता स्वयं भूमि क्रय नही करके भूमि मालिक के साथ जॉइंट डवलपमेंट में रिहायशी, वाणिज्यिक एवं अन्य निर्माण कार्यों को कर रहा है। इसके तहत भूमि मालीक के साथ एक विकासकर्ता अनुबंध पत्र के तहत कार्य करता है।

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Real estate is constantly getting stronger in Covid era: Dr. KV Satish

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जयपुर। बैंक लोन पर स्टाम्प शुल्क पर बजट भाषण एंव अधिसूचना में अंतर तथा वर्तमान दरों को तर्कसंगत एवं सरल बनाने की व्यापार व उद्योग जगत ने मांग की। रियल एस्टेट कारोबारियों का कहना है कि वर्तमान दौर में विकासकर्ता स्वयं भूमि क्रय नही करके भूमि मालिक के साथ जॉइंट डवलपमेंट में रिहायशी, वाणिज्यिक एवं अन्य निर्माण कार्यों को कर रहा है। इसके तहत भूमि मालीक के साथ एक विकासकर्ता अनुबंध पत्र के तहत कार्य करता है। विकासकर्ता अनुबंध पर स्टाम्प ड्यूटी 1 प्रतिशत एवं विकासकर्ता के हिस्से पर 1.5 प्रतिशत है, जो काफी अधिक है। इसे कम करके 0.25 प्रतिशत की जानी चाहिए, क्योकि यह एक व्यापारिक अनुबंध मात्र है, जिसमें अनेक शर्तो की पूर्ति की जानी शेष रहती है एवं अनेक बार अनुबंध इन शर्तो की पूर्ति नही करने से छूट जाते है तथा निर्माण होने पर विक्रय पर पूरी स्टाम्प ड्यूटी मिलती है। इससे व्यापार बढ़ेगा तथा राज्य सरकार के राजस्व में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ अन्य राजस्व भी प्राप्त होंगे, जिससे जीडीपी में बढ़ोत्तरी होना सम्भव है। जीएसटी लागू होने के पश्चात राज्य सरकार को भी जीएसटी की आधी राशी एसजीएसटी के रूप में मिल रही है। ऐसी स्थिति में निर्मित भवनों पर जहां जीएसटी लग रही है, उन पर स्टाम्प ड्यूटी की दर 6 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत किया जाना चाहिए तथा सेस को भी इसी में समाहित किया जाना चाहिए।
रजिस्ट्रेशन शुल्क का बोझ विकासकर्ताओं पर
रजिस्ट्रेशन शुल्क पूर्व में 50,000 से बढ़ाकर 4 लाख कर दिया था, किन्तु अभी इस सीमा को हटा दिया गया है, इसके फलस्वरूप जो अत्यधिक रजिस्ट्रेशन शुल्क का बोझ विकासकर्ताओं पर पड़ेगा, परिणामस्वरूप नये विकासकर्ता अनुबंधो में बहुत कमी आ जाएगी। उपरोक्त से निर्माण कार्यो पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा व आर्थिक मंदी और प्रगाढ रूप से बढऩे की संभावना हो जाएगी। पुराने प्रकरणों में जिनमें प्लॉट्स का विक्रय कर दिया गया है परन्तु जिनकी रजिस्ट्री कई वर्षो से नहीं हुई है, स्कीमस पुरानी हो गई है ऐसे प्रकरणों के अन्दर सरकार द्वारा एक साल के लिए छूट दि जानी चाहिए, ताकि जो सदस्य आज रजिस्ट्री करवाये उनको ब्याज की माफी मिल जाए, ताकि इससे ज्यादा लोगो को इसका फायदा मिल सके व सरकार को राजस्व की आय हो सके। सरकार द्वारा बैंक लोन से सबंधित सभी आर्टिकलस पर 29/03/2001 से 0.10 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी की घोषणा की गई थी परन्तु अभी तक आर्टिकल 37बी में नोटिफिकेशन नही निकला गया है जिसके कारण व्यापारियों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए इस विषय पर अतिशिघ्र नोटिफिकेशन जारी कर व्यापारियों को राहत देने का निवेदन किया गया है।


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