12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सरकार ने मांगा तो राज्यपाल ने लौटाया राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन संशोधन बिल, अब सुधार के बाद आएगा

राजस्थान में शादियों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े बिल पर विवाद और आपत्ति के बाद राज्यपाल कलराज मिश्र ने इसे राज्य सरकार को वापस लौटा दिया हैं और अब इस पर पुनर्विचार कर नए सिरे से विधानसभा में लाया जाएगा।

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Rahul Singh

Feb 09, 2022

jaipur

rajasthan assembly

जयपुर। राजस्थान में शादियों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े बिल पर विवाद और आपत्ति के बाद राज्यपाल कलराज मिश्र ने इसे राज्य सरकार को वापस लौटा दिया हैं और अब इस पर पुनर्विचार कर नए सिरे से विधानसभा में लाया जाएगा। विधानसभा में स्पीकर सीपी जोशी ने इस बिल को लौटाए जाने की सूचना दी। विधानसभा के पिछले सत्र में राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन संशोधन बिल पारित किया गया था। इसमें प्रावधान था कि त अब बाल विवाह का भी रजिस्ट्रेशन होगा। ब्लॉक स्तर तक विवाह रजिस्ट्रेशन अधिकारी रजिस्ट्रेशन करेंगे। इस बिल के पारित होने के समय भाजपा सहित अन्य विपक्ष ने इस पर भारी आपत्ति की थी और सदन से वाकआउट भी किया था। बाद में महिला व अन्य सामाजिक संगठनों की ओर से भी इस बिल पर आपत्ति जताई गई थी। इसके बाद सीएम अशोक गहलोत ने कहा था कि यदि इसमें कोई त्रुटि हैं तो हम इसे वापस लेकर दुबारा से सदन में ले आएंगे। इसके बाद सीएम गहलोत ने इस बिल को वापस लौटाने के लिए राज्यपाल से आग्रह किया था।

बिल में हैं ये प्रावधान—

बिल में यह प्रावधान है कि अगर शादी के वक्त लड़की की उम्र 18 साल से कम और लड़के की उम्र 21 से कम है तो उसके माता-पिता को 30 दिन के भीतर इसकी सूचना रजिस्ट्रेशन अधिकारी को देनी होगी। बाल विवाह के मामले में लड़का-लड़की के माता-पिता रजिस्ट्रेशन अधिकारी को तय फॉर्मेट में ज्ञापन देकर सूचना देंगे। इसके आधार पर रजिस्ट्रेशन अधिकारी उस बाल विवाह को रजिस्टर्ड करेगा। विवाहों के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा 8 में इसका प्रावधान किया गया है। पहले जिला स्तर पर विवाह रजिस्ट्रेशन अधिकारी होते थे। इस बिल में ब्लॉक स्तर तक का प्रावधान किया है।

बाल विवाह के रजिस्ट्रेशन का मतलब वैधता देना नहीं
बाल विवाह के रजिस्ट्रेशन पर विपक्ष ने जमकर सवाल उठाए और इस बिल को वापस लेने की मांग की। बिल पर बहस का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि बाल विवाह के रजिस्ट्रेशन का मतलब उन्हें वैधता देना नहीं है। बाल विवाह करने वालों के खिलाफ उसका रजिस्ट्रेशन करने के बाद भी कार्रवाई होगी। रजिस्ट्रेशन का मतलब उन्हें वैधता देना नहीं है। जबकि विपक्ष का कहना था कि जब बाल विवाह अवैध ही रहेगा तो रजिस्ट्रेशन की जरूरत ही क्या है। लेकिन सरकार ने उस वक्त तर्क दिया कि यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर लाया गया है।

संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में सीमा बनाम अश्विनी कुमार के मामले में फैसला देते हुए निर्देश दिए थे कि सभी तरह के विवाहों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। हर शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। रजिस्ट्रेशन का मतलब शादी को वैधता देना नहीं है। धारीवाल ने कहा कि किसी नाबालिग की शादी हुई है तो बालिग होते ही उसे रद्द करने का अधिकार होगा।


बड़ी खबरें

View All

जयपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग