जयपुर। शहर के आराध्य गोविंददेवजी मंदिर में चल रहे होलिकोत्सव के तीसरे दिन बुधवार को कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुतियों ने बरसाने की होली को साकार कर दिया। कथक नृत्य के माध्यम से ठाकुर जी को रिझाने का सिलसिला तीसरे दिन भी जारी रहा। कलाकारों ने ठाकुर जी के दरबार में अपनी प्रस्तुति दी।
होलिकोत्सव में पं जगदीश शर्मा ने ‘गजानन सब विधि पूरणकाम के साथ शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने मंदिर में ‘होली खेले छै गोविंदो गिरधारी… सुनाकर माहौल जमाने का प्रयास किया। शशि भट्ट ने प्राचीन लोक रचना लहरदार चूनडी क्यूं फाड़ी रे सांवरिया के माध्यम से कान्हा के नटखट स्वरूप का चित्रण किया। कार्यक्रम संयोजक गौरव धामाणी ने बताया कि मंजूलता भट्ट ने होरी खेलन पधारो वृंदावन में गीत सुनाकर होली का आमंत्रण दिया। मोहन कुमार बालोदिया ने आई है फागुण की रूत…., ल्याओ रंग अबीर गुलाल रचना सुनाकर माहौल का सतरंगी कर दिया। कमल कांत कौशिक, ईश्वर दत्त माथुर, समता गोदीका, राजेन्द्र मेवाल, महेन्द्र स्वामी, गौरव भट्ट ने भी फाल्गुनी रचनाएं सुनाई।
ठुमरी पर कथक…थिरके कदम
कथक नृत्य गुरु ज्योति भारती गोस्वामी और उनकी शिष्याओं ने ठुमरी होरी होरी खेलत नंदलाल पर कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। नृत्यगुरु कौशल कांत पंवार ने अन्य कलाकारों के साथ जो पिया आएंगें ब्रज सें पलट के… ठुमरी पर कथक नृत्य प्रस्तुत किया। उन्होंने जसोदा को लाल खेले होरी पर भी नृत्य किया। डेढ दर्जन कलाकारों ने ‘कैसी होरी श्याम मचाये रे… पर नृत्य किया। परवीन मिर्जा के भक्त कवि युगल की सुपरिचित रचना ओ रे नन्द बाबा ने खीज्यो रे पर प्रख्यात नृत्यांगना ज्योति भारती गोस्वामी ने नृत्य प्रस्तुत किया। इनके अलावा डॉ अंकित, डॉ तरुणा जांगिड़, नृत्यगुरु राजेन्द्र राव, बबलू दयाशंकर, दिल्ली से आए कथक गुरु हरीश गंगानी ने भी कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन संजय रायजादा और मंजू शर्मा ने किया।