
जयपुर। राजधानी में आगजनी की घटनाओं के बावजूद सरकार फायर एक्ट प्रस्ताव को दबाकर बैठी है। नगर निगम ने फिर स्वायत्त शासन विभाग को पत्र लिखकर इसकी तत्काल आवश्यकता जताई है। इस बार हाईकोर्ट में विचाराधीन याचिका का हवाला दिया गया है, जो अग्नि दुर्घटनाओं के मामले में लंबित है। निगम आयुक्त रवि जैन ने अलग से बायलॉज की जरूरत मानी है। एक्ट के लिए विभाग की तरफ से अब तक कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है। शहर में पिछले 3 माह में आगजनी की 6 से ज्यादा बड़ी घटनाओं में 5 की मौत हो चुकी है।
अभी भी नहीं जागे -
खूंटेटों का रास्ता में लकड़ी के गोदाम में आग लगने के बावजूद जिम्मेदार हरकत में नहीं आए। जिम्मेदारों की लम्बी अनदेखी का ही नतीजा है कि शहर में जगह-जगह घनी आबादी क्षेत्रों में लकडिय़ों के गोदाम और आरा मशीनें चल रहीं हैं। गोदाम व आरा मशीन पर कम चल रहा है।
नियम या एक्ट नहीं हैं यह कोड
15 मीटर ऊंची बिल्डिंग में फायर हाइड्रेंट, वेट राइजर मय नोजल, फायर डिटेक्शन सिस्टम, मैनुअल कॉल पॉइंट मय हूटर, 20 हजार लीटर पानी का ओवरहैड टैंक और 1 लाख लीटर पानी का टैंक होना जरूरी है। इसके बाद ही अग्निशमन विभाग से एनओसी लेनी होती है, ताकि जिले के आपदा प्रबंधन विभाग को पता रहे कि आपदा के दौरान उसे और क्या-क्या व्यवस्थाएं करनी होंगी। हालांकि, कोड में भवन सुरक्षा के लिए अनुशंसा की गई है, लेकिन यह नियम या एक्ट नहीं है।
यह है एक्ट
Published on:
21 Apr 2018 10:01 am

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