
ग्रेटर निगम में बैकफुट पर भाजपा पार्षद, बात बिगड़ने से पहले संगठन की संभाली कमान
जयपुर। ग्रेटर नगर निगम में मची सियासी उठापटक के बीच संगठन की सक्रियता बढ़ गई है। इसके बाद पार्षदों का बैकफुट पर आना शुरू हो गया।
शुक्रवार को सुबह एक—एक पार्षद को फोन करके संकल्प पत्र के बारे में जानकारी ली गई। जब संगठन की ओर से पार्षदों के पास फोन पहुंचे तो कई पार्षदों की समझ में आने लगा कि इस पूरे मामले में गुमराह किया जा रहा है। संगठन की ओर से साफ कर दिया गया है कि किसी के भी कहने पर संकल्प पत्र पर हस्ताक्षर न करें। पहले संगठन से बात करें।
इससे पहले गुरुवार शाम को जिला अध्यक्ष के आवास पर चुनिंदा समिति अध्यक्षों की बैठक हुई। समिति अध्यक्षों ने घटनाक्रम की जानकारी जिलाध्यक्ष राघव शर्मा को दी।
ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया सहित अन्य प्रमुख पदाधिाकरियों को जिला अध्यक्ष शनिवार शाम तक रिपोर्ट सौंप सकते हैं।
शील धाभाई के कार्यकाल में लिखी थी पटकथा
सूत्रों की मानें तो शहर के एक विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र के दो पार्षदों के चेयरमैन बनाए जाने से खुश नहीं थे। इनकी जगह अपने चहेतों को चेयरमैन बनवाना चाहते थे। ऐसे में विधायक ने शील धाभाई को पत्र लिखा। हालांकि, धाभाई ने उस समय ये कहकर मना कर दिया कि मैं अभी ऐसे फैसले लेने की स्थिति में नहीं हूं।
—संगठन और विधायकों में अनबन लम्बे समय से चल रही है। समितियों के गठन में भी विधायकों की नहीं चली। ऐसे में पार्षदों को आगे कर विद्रोह करवा रहे हैं।
इसलिए समितियों में फेरबदल करना आसान नहीं
—नगर पालिका अधिनियम में अध्यक्षों को हटाने का कोई प्रावधान नहीं है।
सेक्शन 55 में सिर्फ समितियों के गठन का प्रावधान है।
—राज्य सरकार ने समितियों को भंग कर दिया था, इसके बाद समितियों की बहाली उच्च न्यायालय से हुई थी। कोर्ट ने समितियों के रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी थी।
Published on:
09 Apr 2022 08:06 am

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