नगर निगम ग्रेटर के पूर्व आयुक्त यज्ञमित्र सिंह देव के साथ बदसलूकी मामले में भाजपा के निलंबित तीन पार्षदों पर सरकार कार्रवाई के मूड में नजर आ रही है। तीनों पार्षदों को बर्खास्त करने के साथ ही उनके छह साल तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। हालांकि महापौर सौम्या गुर्जर पर कार्रवाई की जाएगी या नहीं, इसे लेकर सरकार पसोपेश में नजर आ रही है।
सरकार ने पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच करवाई थी। जांच में सौम्या गुर्जर और पार्षद शंकर शर्मा, अजय सिंह और पारस जैन को दोषी पाया गया है। इस आदेश को यूडीएच मंत्री के पास भेजा गया है। मंत्री स्तर पर ही चारों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर निर्णय किया जाएगा। हालांकि सरकार सौम्या गुर्जर के खिलाफ कार्रवाई को लेकर जल्दबाजी नहीं करेगी। सरकार चाहती है कि पहले न्यायिक जांच की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेशन की जाए। इसके बाद मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होगा। चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा हुआ है, इसलिए सरकार अतिरिक्त महाधिवक्ता से विधिक राय भी ले सकती है।
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जल्दबाजी नहीं करेगी सरकार
पूरे मामले पर सरकार जल्दबाजी नहीं करेगी। सरकार चाहे तो न्यायिक जांच की रिपोर्ट के आधार पर सौम्या गुर्जर को मेयर के पद से बर्खास्त कर सकती है। मगर न्यायिक जांच के समय सौम्या गुर्जर को मेयर पद से निलंबित करने के बाद सुप्रीम कोर्ट के स्टे ऑर्डर से सरकार की किरकिरी हुई थी। जिस वजह से पूरे मामले में सरकार कानूनी तरीके से ही आगे बढ़ना चाह रही है।
सौम्या के पास बचा केवल एक रास्ता
नगर निगम के पूर्व निदेशक विधि अशोक सिंह ने बताया कि सौम्या गुर्जर के पास सरकार के इस एक्शन पर केवल सिविल रीट के जरिए ही न्यायालय में जाने का अधिकार है। सरकार के पद से निलंबन पर स्टे लेने के लिए वह न्यायालय में पिटिशन नहीं लगा सकेगी। हालांकि न्यायिक जांच के खिलाफ सौम्या गुर्जर क्या कार्रवाई करेंगी, इसका खुलासा नहीं हुआ है।