
जयपुर। ग्रेटर नगर निगम आयुक्त कार्यालय में आम आदमी और जनप्रतिनिधियों का प्रवेश आसानी से नहीं होता। सभी लोग आयुक्त यज्ञमित्र सिंह देव का बाहर ही इंतजार करते हैं। कई बार तो लोगों को दो से तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। हालांकि, ये बात भी सही है कि चुनिंदा पार्षदों और सिफारिश से आने वाले आम लोगों को कार्यालय में प्रवेश जरूर मिल जाता है।
दरअसल, चार जून, 2021 को महापौर—आयुक्त विवाद के बाद यह व्यवस्था शुरू की गई थी। उस समय वजह कोरोना को बताया गया। अब राज्य सरकार कोरोना गाइडलाइन खत्म कर चुकी है, लेकिन ग्रेटर में आयुक्त की ओर से अभी भी इसकी सख्ती से पालना करवाई जा रही है।
कांग्रेस पार्षदों ने भी खोला मोर्चा
हाल ही में कांग्रेस के 40 से अधिक पार्षदों ने मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात कर एक पत्र सौंपा। इसमें लिखा है कि आयुक्त की कार्यशैली से कांग्रेस के सभी पार्षद असंतुष्ट हैं। विकास कार्यों को गति नहीं दी जा रही है। कांग्रेस पार्षद सुभाष शर्मा ने बताया कि 15 माह में लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। आयुक्त सुनने को तैयार नहीं हैं।
महापौर कार्यालय के सीसीटीवी कैमरे नहीं हुए चालू
आयुक्त कार्यालय के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे चालू हैं। वहीं, महापौर कार्यालय के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे बंद हैं। जबकि, महापौर सौम्या गुर्जर ने सात फरवरी को कैमरे चालू करने के लिए नोटशीट लिखी थी, लेकिन एक्सईएन मुख्यालय और प्रोग्रामर शाखा के बीच में उलझकर रह गया है।
कोरोना गाइडलाइन की पालना
कोरोना गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए बाहर ही सभी से मिलता हूं। जिन लोगों की समस्याएं होती हैं, संबंधित अधिकारियों को बुलाकर वहीं दिशा निर्देश दे देता हूं।
—यज्ञमित्र सिंह देव, आयुक्त, ग्रेटर नगर निगम
Published on:
05 Mar 2022 09:58 am
