31 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

कंक्रीट का जंगल लील गया हरियाली, घास-सजावटी पौधों तक हरित क्षेत्र

अब ग्रीन ओरिएंटेड डवलपमेंट कंसेप्ट लागू करने की जरूरत, शहरों में निर्मित क्षेत्र के अनुपात में 15 की बजाय 7त्न ही घनी सघन हरियाली, 10 साल पहले घनी हरियाली का प्रतिशत 7.11 था, जो अब भी केवल 7.23 प्रतिशत ही टाउनशिप और बड़ी आवासीय योजनाओं में सजावटी हरियाली का बढ़ रहा दायरा
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जयपुर

•

image

Sanjay Kaushik

•

Updated: 14 Oct 2021, 4:17 PM IST

a2.jpg

संजय कौशिक / जयपुर. कंक्रीट के जंगल के बीच शहरों में हरियाली की जरूरत सरकारों को अब भी समझ में नहीं आ रही। प्रदेश के शहरों में अभी निर्मित क्षेत्र के अनुपात में 7 फीसदी ही घनी हरियाली है, जबकि जरूरत 15 प्रतिशत की है। गंभीर तथ्य यह भी है कि दस साल पहले घनी हरियाली का प्रतिशत 7.11 था, जो अब भी केवल 7.23 फीसदी ही है। यानी हरियाली का दायरा कागजों में ही बढ़ता रहा।

टाउनशिप और बड़े आवासीय प्रोजेक्ट्स में हरियाली का निर्धारित क्षेत्रफल 15 प्रतिशत है, लेकिन यहां भी सजावटी पौधों व घास को ही हरियाली मानकर आगे बढ़ते रहे। ऐसे हालात पर नगर नियोजन विभाग ने चिंता जताते हुए ग्रीन ओरिएंटेड डवलपमेंट (हरित आधारित विकास) का खाका तैयार किया है, लेकिन यह कागजों तक ही सीमित है। पत्रिका भी लगातार हरियाली बढ़ाने का मुद्दा उठाता रहा है।

ये हैं प्रावधान और हकीकत
- अभी टाउनशिप पॉलिसी में 40 फीसदी खुला हरित क्षेत्र छोडऩा अनिवार्य है। विकासकर्ता इसमें घनी हरियाली की बजाय घास और सजावटी पौधे लगा औपचारिकता निभा रहे हैं। इससे जमीनी हिस्से पर तो हरियाली नजर आती है, लेकिन वास्तव में पर्यावरण के लिए जरूरी हरित हिस्सा नहीं होता।

जरूरत: टाउनशिप में घनी हरियाली की अनिवार्यता हो। ऐसे पौधे भी लगाए जाएं, जो वृक्ष के रूप में वर्षों तक साथ रहें।

- बिल्डिंग बाइलॉज और टाउनशिप पॉलिसी में अब तक 50 वर्गमीटर क्षेत्रफल में एक पौधा लगाना अनिवार्य था। इसे बढ़ाकर दो तो कर दिया, लेकिन निगरानी के अभाव में सजावटी पौधों पर फोकस है।

जरूरत: सजावटी नहीं बल्कि घने वृक्ष में रूप विकसित हों। इससे हरियाली का दायरा दोगुना बढ़ेगा। केवल सजावटी पौधे लगाने पर सख्त कार्रवाई के प्रावधान हों।

जल स्रोतों और सड़क किनारे हरियाली का प्रतिशत तय नहीं है। वीआइपी क्षेत्र और रूट पर ही पौधों व वृक्षों का दायरा फैलाया जा रहा है। जयपुर शहर में ही केवल 47 रूट ऐसे हैं जहां घनी हरियाली पर काम हुआ है।

जरूरत: जल स्रोतों के सटे हिस्से अब बफर जोन बनें। ऐसे नदी, नाले, तालाब के चारों तरफ तय दूरी तक घनी हरियाली करना अनिवार्य हो। सड़क किनारे का हिस्सा कच्चा ही रखते हुए उसमें फलदार पौधे लगाने होंगे।

शहरों में कुल निर्मित क्षेत्र (बिल्टअप एरिया) के अनुपात में कम से कम 15त्न घना हरियाली क्षेत्र होना जरूरी होगा। अभी यह अलग-अलग शहरों में 7 से 10 फीसदी ही है और वह भी घना नहीं है।
जरूरत: अब जमीन के साथ इमारतों की उंचाई बढऩे के अनुपात में टाउनशिप हिस्से की जमीन पर हरियाली क्षेत्र का दायरा भी बढ़ता जाए। सड़क से लेकर आवासीय-कॉमर्शियल योजनाओं और हजारों बीघा खाली जमीन इसके दायरे में हो।