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73 लोगों की जान ले चुका है गुर्जर आंदोलन, 2008 से हुआ था शुरू, जानें कब क्या हुआ

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73 लोगों की जान ले चुका है गुर्जर आंदोलन, 2008 से हुआ था शुरू, जानें कब क्या हुआ

शैलेन्द्र अग्रवाल / जयपुर. गुर्जर आन्दोलन 29 मई 2007 को शुरू हुआ था। इसके बाद आरक्षण की मांग को लेकर रह-रहकर इस आन्दोलन की चिंगारी सुलगी। इस दौरान एक पुलिसकर्मी सहित 73 लोगों की जान भी गई।

तब से अब तक

- 29 मई 2007 को एसटी आरक्षण की मांग को लेकर दौसा जिले के पाटोली में आंदोलन शुरू हुआ। प्रदेश में विभिन्न जगह यातायात रोकने और उग्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस से हुई झड़प में 31 गुर्जरों की मौत हुई। एक पुलिसकर्मी की भी मृत्यु हुई।


- पूर्व न्यायाधीश जसराज चौपड़ा की कमेटी बनी, कमेटी ने विशेष पिछड़ापन माना।

- 23 मई 2008 को बयाना के पास स्थित पीलूपुरा रेलवे ट्रैक और आगरा रोड पर सिकंदरा पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। इस आंदोलन में 42 लोगों की जान गई।


- विशेष पिछड़ा वर्ग (एसबीसी) में 5 फीसदी आरक्षण देने पर सहमति बनी। वर्ष 2008 में भाजपा शासन में राज्य सरकार ने विधेयक पारित कराया और 2009 में कांग्रेस शासन में राज्यपाल ने हस्ताक्षर कर विधेयक को मंजूरी दी।

- वर्ष 2009 में फिर आंदोलन शुरू हुआ। विधेयक पर राज्यपाल ने हस्ताक्षर किए लेकिन कोर्ट ने रोक लगा दी।

- वर्ष 2010 में गुर्जरों ने फिर आंदोलन किया।

- मई 2010 में एक फीसदी आरक्षण दिया गया।


- दिसबर 2010 में फिर रेलवे ट्रैक रोका तो 5 जनवरी 2011 को समझौता हुआ कि सरकार कोर्ट के आदेशानुसार आरक्षण देगी।

- वर्ष 2012 में ओबीसी कमीशन ने गुर्जर सहित 5 जातियों के पक्ष में रिपोर्ट दी।


- वर्ष 2013 में कोर्ट ने 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण पर रोक लगा दी।

- 21 मई 2015 को फिर आंदोलन हुआ। रेलवे ट्रैक जाम किया गया। 28 मई को समझौते के बाद 5 फीसदी एसबीसी और आर्थिक आधार पर ईबीसी को 14 प्रतिशत आरक्षण का अलग-अलग विधेयक पेश किया गया।


- 16 अक्टूबर 2015 को 5 प्रतिशत आरक्षण मिलने लगा। चौदह माह आरक्षण रहा और 1252 लोगों की नौकरी लगी।

- 9 दिसबर 2016 को हाईकोर्ट ने 5 प्रतिशत आरक्षण रद्द कर दिया।


- वर्ष 2017 में फिर आंदोलन की चेतावनी दी गई। सरकार सुप्रीम कोर्ट में गई, वहां एसबीसी आरक्षण को लेकर एसएलपी लंबित।

- वर्ष 2017 में एमबीसी आरक्षण देना तय हुआ। ओबीसी आरक्षण 21 से बढ़ाकर 26 फीसदी किया गया लेकिन लागू होने से पहले कोर्ट में याचिका लग गई और इस पर अक्टूबर 2017 में रोक लग गई।
(जैसा गुर्जर नेता हिम्मत सिंह ने बताया)