
जिन अधिकारियों-कर्मचारियों के परिवार साल के अंत में धूमने-फिरने जाने का प्लान बना रहे हैं, उनका शिड्यूल गडबड़ा सकता है। वजह आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल विस्तार होगा और उसके बाद सरकारी कामकाज रफ्तार पकड़ेगा। इसके अलावा मंत्रियों के पद संभालते ही उनके स्टाफ व विभागों में अधिकारियों- कर्मवारियों की अदला-बदली भी होगी।
मंत्रियों के कामकाज संभालने ही विभागीय बैठकों का सिलसिला तेज हो जाएगा। विधायकों की शपथ व विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के बाद एक बार तो सत्र का समापन हो जाएगा, लेकिन बजट सत्र की तैयारियां आरंभ हो जाएंगी। बजट सत्र नए साल का पहला विधानसभा सत्र होने के कारण इसमें ही राज्यपाल का अभिभाषण होगा, जिसका दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया जल्द शुरू हो जाएगी। इसी माह मुख्य सचिव ऊषा शर्मा का कार्यकाल पूरा हो रहा है, ऐसे में ब्यूरोक्रेसी में बदलाव होगा। इसके अलावा बोर्ड, निगम व समितियों में नए सदस्यों का मनोनयन भी शुरू हो सकता है, क्योंकि बजट सत्र से पहले नहीं किया तो लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण यह काम अटक सकता है।
अगले सप्ताह शुरू हो जाएंगी बीएफसी की बैठकें
पुरानी परिपाटी जारी रही तो संभवतया अभी सरकार अंतरिम बजट या लेखानुदान पारित कराएगी, लेकिन बजट पूर्व तैयारियों के लिए की बैठकों का दौर अगले सप्ताह में ही शुरू हो जाएगा। वित्त विभाग ने इन विभागवार बैठकों का कलेण्डर जारी कर दिया है। इन बैठकों के लिए विभागों को तैयारी करनी होगी, जिसके कारण अब अधिकारियों-कर्मचारियों को छुट्टी मिलने में दिक्कत आएगी।
पहले कमेटियों का गठन और फिर बजट सत्र की तैयारी
उधर, विधानसभा में भी शपथ के लिए होने वाले संक्षिप्त सत्र के बाद ही बजट सत्र की तैयारियां और कमेटियों के गठन की प्रक्रिया शुरू हो जाएंगी।
मंत्री लगाएंगे पसंद के अधिकारी-कर्मचारी
मंत्रियों के कामकाज संभालने के साथ स्टाफ व विभागों में पसंद के अधिकारी-कर्मचारी लगाने का काम शुरू हो जाएगा। यह काम अभी शुरू नहीं किया तो 6 जनवरी से मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कार्य शुरू होने से चुनाव कार्य से संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले के लिए चुनाव आयोग की अनुमति लेनी होगी।
Published on:
19 Dec 2023 09:39 am
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